Major Rivers of Uttarakhand: ‘देवभूमि’ के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड एक भारत का एक ऐसा राज्य है जो सदैव बहती पवित्र और जीवनदायिनी नदियों से समृद्ध है। ये नदियां न सिर्फ राज्य की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाती हैं, बल्कि इसे उत्तर भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र स्थलों में से एक बनाती हैं। उत्तराखंड की नदियां अपनी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्ता के लिए जानी जाती हैं। माना जाता है कि भारत, तिब्बत और नेपाल के हिमनदों से उद्गमित ये नदियां धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पूजनीय हैं।
साथ ही यह राज्य के आर्थिक, सामाजिक एवं पारिस्थितिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। नदियों के बिना उत्तराखंड की कल्पना करना असंभव है। इन्हें राज्य की जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि इनका उपयोग पूजा-पाठ से लेकर कृषि और दैनिक जीवन के कार्यों तक किया जाता है। उत्तराखंड की नदियां अपने पवित्र संगम स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध हैं, जहां दो नदियां मिलकर प्रयाग का निर्माण करती हैं। ऐसे पांच प्रमुख प्रयाग (पंच प्रयाग) हैं जो राज्य के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं में इन नदियों का विशेष स्थान है, और आज भी इनकी पूजा श्रद्धा से की जाती है।

उत्तराखंड की प्रमुख नदियां (फोटो: Canva)
उत्तराखंड में कितनी नदियां बहती हैं?
बात अगर उत्तराखंड की नदियों की करें तो, यहां 40 से अधिक नदियां युगों से बहती आ रही हैं। आज हम आपको इन्हीं में से कुछ के नाम बताने जा रहा हैं। तो आइए जानते हैं इनके बारे में-
गंगा नदी
गंगा भारत की सबसे श्रद्धेय और पवित्र नदियों में से एक है। इसका उद्गम उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद से भागीरथी के रूप में होता है। देवप्रयाग में अलकनंदा से संगम के बाद यह ‘गंगा’ नाम से जानी जाती है। यह नदी ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रमुख धार्मिक नगरों से होकर बहती है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु स्नान और पूजा के लिए आते हैं।
यमुना नदी
यमुना नदी का जन्म यमुनोत्री ग्लेशियर से होता है, जो उत्तराखंड के पश्चिमी भाग में स्थित है। इसे देवी स्वरूपा माना जाता है और इसका पवित्र स्थल यमुनोत्री मंदिर चार धामों में से एक है। यह नदी अपनी पौराणिक महत्ता और धार्मिक आस्था के लिए जानी जाती है।
भागीरथी नदी
भागीरथी, गंगा की एक प्रमुख उपनदी है, जो गंगोत्री हिमनद से निकलती है। यह उत्तरकाशी से होते हुए देवप्रयाग पहुंचती है, जहां अलकनंदा से मिलकर गंगा का निर्माण करती है। हिंदू मान्यता के अनुसार, राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से यह नदी पृथ्वी पर अवतरित हुई थी।
अलकनंदा नदी
अलकनंदा का उद्गम सतोपंथ ग्लेशियर (बद्रीनाथ के समीप) से होता है। यह पांचों प्रयागों — विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग — से होकर गुजरती है। देवप्रयाग में यह गंगा का निर्माण करती है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
मंदाकिनी नदी
केदारनाथ के निकट चोराबारी ग्लेशियर से निकलने वाली मंदाकिनी नदी, रुद्रप्रयाग में अलकनंदा से मिलती है। यह केदारनाथ धाम से गहराई से जुड़ी हुई है और अपनी आध्यात्मिक पवित्रता के लिए पूजनीय है।

उत्तराखंड की प्रमुख नदियां (फोटो: Canva)
धौलीगंगा नदी
धौलीगंगा नदी का स्रोत चमोली जिले के नीति दर्रे के पास है। यह सुंदर हिमालयी घाटियों से होकर बहती हुई विष्णुप्रयाग में अलकनंदा से संगम बनाती है। यह नदी जलविद्युत उत्पादन के लिए भी जानी जाती है।
पिंडर नदी
पिंडर नदी कुमाऊं क्षेत्र के पिंडारी ग्लेशियर से उत्पन्न होती है और कर्णप्रयाग में अलकनंदा से मिलती है। यह क्षेत्र ट्रेकिंग, साहसिक पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।
नंदाकिनी नदी
नंदाकिनी का उद्गम नंदा घुंटी पर्वतीय क्षेत्र से होता है। यह नंदप्रयाग में अलकनंदा से मिलती है, जो पंच प्रयागों में से एक है। यद्यपि यह अपेक्षाकृत छोटी नदी है, लेकिन इसका धार्मिक और भौगोलिक महत्व विशेष है।
रामगंगा नदी
रामगंगा नदी चमोली जिले की दूधातोली पहाड़ियों से निकलती है और प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरती है। आगे चलकर यह उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है और क्षेत्र के वन्यजीवों तथा कृषि के लिए जीवनदायिनी है।

उत्तराखंड की प्रमुख नदियां (फोटो: Canva)
काली (शारदा) नदी
काली नदी का उद्गम कालापानी (पिथौरागढ़) से होता है। यह भारत और नेपाल के बीच सीमा का निर्माण करती है। नीचे के भाग में इसे शारदा नदी कहा जाता है, और अंततः यह उत्तर प्रदेश में घाघरा नदी से मिल जाती है।
गौला नदी
गौला नदी का स्रोत भीमताल (नैनीताल जिले) के निकट है। यह तराई क्षेत्र की ओर बहती हुई हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों को पेयजल और सिंचाई का प्रमुख स्रोत प्रदान करती है।
सरयू नदी
सरयू नदी कपकोट (बागेश्वर) के पास से निकलती है। यह कुमाऊं क्षेत्र की एक पवित्र नदी है, जो पंचेश्वर में काली नदी से मिलती है। इसका धार्मिक महत्व तो है ही, साथ ही यह कृषि के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।
गोरी गंगा नदी
गोरी गंगा का उद्गम मिलम ग्लेशियर से होता है और यह पिथौरागढ़ के मुनस्यारी क्षेत्र से होकर बहती है। यह तेज प्रवाह वाली हिमालयी नदी काली नदी में मिल जाती है और अपने रोमांचक व्हाइट वॉटर रैपिड्स के लिए जानी जाती है।
प्रत्येक नदी की अपनी विशिष्ट पहचान और महत्ता है, जो उसे अन्य से अलग बनाती है। साथ ही, ये नदियां जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई जैसी परियोजनाओं का प्रमुख स्रोत भी हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं के कारण पारिस्थितिकी और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहे हैं, जो चिंता का विषय है।
