Yamuna Pollution: दिल्ली में इस बार मानसून जमकर बरसा है। इसका असर यमुना नदी पर भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। पहाड़ों से आया पानी और दिल्ली की बाढ़ के पानी के साथ यमुना की काफी गंदगी बह गई है। राजधानी में यमुना के अधिकांश जगहों पर पानी पहले की तुलना में काफी साफ नजर आ रहा है। हर साल मानसून के दौरान यमुना में प्रदूषण का स्तर कुछ कम होता है लेकिन इस बार स्थिति कहीं अधिक बेहतर बनी हुई है। यह कहना है दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की रिपोर्ट का।
मानसून और सफाई अभियान का हुआ असर
अगस्त 2023 में जब दिल्ली में कई दिनों तक बाढ़ की स्थिति रही थी, तब भी यमुना का प्रदूषण इतना कम नहीं हुआ था। इस बार फरवरी से ही दिल्ली सरकार ने यमुना सफाई का अभियान तेज कर दिया था। नालों की सफाई और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) को बेहतर करने से भी प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई।
जुलाई में प्रदूषण था चरम पर
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की जुलाई रिपोर्ट में यमुना में प्रदूषण के रिकॉर्ड स्तर दर्ज किए गए थे। खासकर आइटीओ बैराज के पास फीकल कोलीफार्म (मल-मूत्र से होने वाला प्रदूषण) की मात्रा 92 लाख MPN प्रति 100 मिलीलीटर तक पहुंच गई थी, जो सामान्य मानक (500 MPN प्रति 100 मिली) से कई गुना अधिक थी।
सितंबर में हालात में बड़ा सुधार
सितंबर रिपोर्ट के अनुसार, आइटीओ और अन्य स्थानों पर अब फीकल कोलीफार्म का स्तर घटकर 1800 MPN रह गया है। बीओडी (Biochemical Oxygen Demand) और डीओ (Dissolved Oxygen) स्तर में भी शानदार सुधार हुआ है। पल्ला में बीओडी 3 mg/l से कम और वजीराबाद में 3.5 mg/l दर्ज की गई है, जबकि डीओ मानक के अनुरूप अधिकांश जगहों पर पाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार आइटीओ बैराज के सभी गेट खोले जाने और कई जगहों से गाद निकलने से नदी का बहाव पिछले सालों की तुलना में बेहतर रहा। इससे यमुना में प्रदूषण के स्तर में कमी आई है और पानी पिछले कुछ सालों की तुलना में साफ दिख रहा है।
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