दिल्ली पुलिस सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की साइबर टीम ने बैंक अधिकारियों को कंपनी का डायरेक्टर बनकर धोखा देने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्जी ईमेल और कंपनी के नकली लेटरहेड का इस्तेमाल कर बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों से 22.56 लाख रुपये दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। पुलिस ने इस मामले और इससे जुड़े अन्य मामलों की जांच के दौरान लगभग 2.50 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की है। बरामद सामान में सोने के 101 सिक्के, सोने की चेन, कड़े, हार, अंगूठियां, नकदी और एक नई महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी शामिल है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के लोनी निवासी 36 वर्षीय विनय कुमार यादव और नोएडा निवासी 65 वर्षीय अनिल कुमार सहगल के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों के खिलाफ पहले भी आर्थिक धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। विनय कुमार यादव एक अन्य मामले में घोषित अपराधी है और सात साल से ज्यादा समय से फरार चल रहा था।
FD बनवाने की बात कहकर जीता बैंक अधिकारियों का भरोसा
पुलिस के मुताबिक, मामला 5 अगस्त 2026 का है। बैंक ऑफ इंडिया की राजेंद्र प्लेस शाखा के मैनेजर ने शिकायत दी थी कि किसी व्यक्ति ने कंपनी के डायरेक्टर दीपक मल्होत्रा बनकर बैंक अधिकारियों से संपर्क किया। आरोपी ने पहले एक करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) बनवाने की बात की और अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों पर चर्चा कर खुद को असली डायरेक्टर साबित करने की कोशिश की।
कुछ समय बाद आरोपी ने फोन कर कहा कि कंपनी के खाते से भुगतान करना है, लेकिन चेकबुक खत्म हो गई है। इसलिए ईमेल के जरिए भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके बाद बैंक के आधिकारिक ईमेल पर कंपनी के असली ईमेल पते से मिलता-जुलता एक फर्जी ईमेल भेजा गया। इसमें कंपनी के नकली लेटरहेड पर 22,56,922 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया था।
जब बैंक अधिकारियों ने जरूरी दस्तावेज और क्षतिपूर्ति संबंधी कागजात मांगे तो आरोपी ने जल्द भुगतान करने का दबाव बनाया। उसने दावा किया कि पहले भी इस तरह के लेनदेन हो चुके हैं। उसकी बातों में आकर बैंक से 22.56 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कर दिए गए।
फर्जी पहचान और दूसरे राज्यों के बैंक खातों का इस्तेमाल
शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने साइबर थाने में ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम पश्चिम बंगाल में बंधन बैंक के एक खाते में भेजी गई थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने बैंक अधिकारियों से संपर्क करने के लिए जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया और ईमेल से जुड़ी तकनीकी जानकारियां मिलीं, वे फर्जी पहचान से जुड़ी थीं।
पुलिस टीम ने मोबाइल नंबरों के रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और दूसरी तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण किया। इसके बाद आरोपियों की पहचान कर उन्हें गाजियाबाद के लोनी से गिरफ्तार किया गया। जांच में पश्चिम बंगाल और बिहार में एक्टिव उनके अन्य सहयोगियों के बारे में भी जानकारी सामने आई है।
ठगी की रकम से खरीदे सोने के सिक्के और थार
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ठगी की रकम को दूसरे खातों में भेजने के बाद सोना खरीदने और एटीएम से नकदी निकालने जैसे तरीकों से इस्तेमाल किया। जांच में पश्चिम बंगाल के एक ज्वेलर से करीब 18.50 लाख रुपये का सोना ऑनलाइन खरीदने की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस ने मौजूदा और इससे जुड़े मामलों की जांच के दौरान लगभग 2.50 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की है। इसमें अलग-अलग वजन के 101 सोने के सिक्के, 17 सोने की चेन, सोने के कड़े और चेन वाला ब्रेसलेट, तीन हार, तीन अंगूठियां, तीन जोड़ी बालियां, एक नथ, एक सोने का टीका, 2.37 लाख रुपये नकद और तीन मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा अगस्त 2026 में खरीदी गई एक नई महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी भी बरामद की गई है। पुलिस बरामद संपत्ति का ठगी के मामलों से संबंध जांच रही है।
जेल में हुई थी दोनों आरोपियों की जान-पहचान
जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी पहले भी कई आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में शामिल रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों की जान-पहचान जेल में हुई थी। इन पर पहले चेक से जुड़ी धोखाधड़ी करने और कथित तौर पर 'मैजिक पेन' का इस्तेमाल करने के आरोप भी रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, विनय कुमार यादव के खिलाफ गाजियाबाद, सहारनपुर और दिल्ली सहित अलग-अलग जगहों पर कई मामले दर्ज हैं। साल 2009 में दिल्ली के कमला मार्केट थाने में दर्ज जाली नोट के मामले में भी उसे गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान उसके पास से 4500 रुपये के नकली नोट बरामद हुए थे। इस मामले में वह 8 अगस्त 2019 से घोषित अपराधी है।
वहीं, अनिल कुमार सहगल के खिलाफ भी फरीदाबाद, अयोध्या, गाजियाबाद और अन्य स्थानों पर धोखाधड़ी के मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है।
छह अन्य मामलों का भी खुलासा
दिल्ली पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी से इसी तरह के छह अन्य मामलों का भी खुलासा हुआ है। इनमें गुरुग्राम, पलवल, दिल्ली के साउथ-ईस्ट और रोहिणी जिलों में दर्ज मामले शामिल हैं। इन मामलों में आईसीआईसीआई बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक के खातों को निशाना बनाया गया था।
पुलिस के मुताबिक, इन मामलों में लगभग 16.65 लाख रुपये से लेकर 2.98 करोड़ रुपये तक की रकम शामिल है। एक मामले में 88 लाख रुपये की ठगी की कोशिश की गई थी, जिसे प्रयास के तौर पर दर्ज किया गया है।
बैंकों को पुलिस की सलाह
दिल्ली पुलिस ने बैंकों और कंपनियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस का कहना है कि बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले बैंक अधिकारियों को कंपनी के अधिकृत व्यक्ति से उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर सीधे संपर्क करके पुष्टि करनी चाहिए। सिर्फ ईमेल या फोन पर मिले निर्देशों के आधार पर भुगतान नहीं करना चाहिए। जरूरी दस्तावेजों और बैंक की तय प्रक्रिया को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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पुलिस ने लोगों और कंपनियों से साइबर ठगी या फर्जी पहचान के जरिए भुगतान कराने की कोशिश होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। इसके लिए साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in का इस्तेमाल किया जा सकता है।
