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दो दिन नहीं, सिर्फ 12 घंटे में पहुंच जाएंगे चीन बॉर्डर तक; अगले साल शुरू हो जाएगी ये नई सामरिक महत्व की रोड

भारत ने लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी तक चीन की निगरानी से दूर एक वैकल्पिक सड़क मार्ग का निर्माण तेज कर दिया है। 130 किमी लंबी यह सड़क दो दिन की यात्रा को घटाकर 12 घंटे कर देगी। सीमावर्ती इलाके में बेहतर सैन्य तैनाती और रसद आपूर्ति के लिए BRO इसे तैयार कर रहा है।

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दौलत बेग ओल्डी तक बन रही नई सड़क (सांकेतिक तस्वीर) (फोटो - bro.gov.in)

भारत और चीन के रिश्ते दोस्ताना तो नहीं रहे हैं, लेकिन 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद हालात और बिगड़ गए। 1962 की लड़ाई में चीन ने भारत की काफी जमीन पर कब्जा कर लिया था। जिसके बाद से दोनों देशों के बीच रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं। दोनों देशों के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर सेनाएं अक्सर आमने-सामने जाती हैं।

अब भारत ने LAC पर स्ट्रैटजिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। भारत दौलत बेग ओल्डी (DBO) तक चीन की निगरानी से दूर एक वैकल्पिक मार्ग बना रहा है, जो अगले साल तक तैयार हो जाएगा। साल 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए इस रोड का काम शुरू किया गया है।

यह नई 130 किलोमीटर लंबी सड़क सासोमा-सासेर ला-सासेर ब्रंगसा-गपशान-DBO मार्ग से होकर गुजरेगी और मौजूदा दारबुक-श्योक-DBO (DSDBO) मार्ग की तुलना में ज्यादा सुरक्षित व तेज विकल्प साबित होगी, जिस पर अक्सर चीन की नजर रहती है।

घट जाएंगी दूरियां, समय भी कम लगेगा

इस सड़क का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) कर रहा है। यह सड़क लेह से DBO की दूरी को 79 किलोमीटर तक घटा देगी। यही नहीं, नई सड़क का काम पूरा हो जाने से यात्रा दो दिन की बजाय मात्र 11-12 घंटों में पूरी हो जाएगी। यह न सिर्फ सेना की तेजी से तैनाती में मददगार होगी, बल्कि रसद आपूर्ति में भी सहूलियत देगी।

दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पट्टी

बता दें कि दौलत बेग ओल्डी में दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पट्टी (16,614 फीट) है। सामरिक महत्व वाले कराकोरम दर्रे और डेपसांग क्षेत्र के नजदीक होने के कारण डीबीओ का काफी महत्व है। डेपसांग में चीन की तरफ से अक्सर भारतीय सेना को चुनौती का सामना करना पड़ता है।

BRO ने नई सड़क पर 9 पुलों की क्षमता में बढ़ोतरी की है। इन पुलों से पहले 40 टन तक भार ले जाया जा सकता था, जिसे बढ़ाकर अब 70 टन किया गया है। जिससे भारी वाहन और तोपखाने यहां से आसानी से आ-जा सकें। Bofors और अन्य हथियार प्रणालियों के साथ इनका सफल परीक्षण भी हो चुका है।

500 करोड़ की परियोजना

यह सड़क सियाचिन बेस कैंप के पास सासोमा (नुब्रा घाटी) से शुरू होकर सीधे DBO तक जाएगी, जिससे लेह होकर जाने की जरूरत नहीं रहेगी। 500 करोड़ की इस परियोजना पर ‘प्रोजेक्ट विजयक’ सासोमा से सासेर ब्रंगसा तक का कार्य देख रहा है जबकि ‘प्रोजेक्ट हिमांक’ ब्रंगसा से DBO तक का कार्य संभाल रहा है।

17,000 फीट की ऊंचाई पर मौजूद इस क्षेत्र में भारी बर्फबारी होती है और यहां ऑक्सीजन की कमी भी रहती है। भारी बर्फबारी के चलते यहां साल में सिर्फ 5-6 महीने ही निर्माण कार्य संभव हो पाता है। श्रमिकों के लिए BRO ने यहां विशेष 'ऑक्सीजन कैफे' बनाए हैं, ताकि कार्य कुशलता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

इसके साथ ही, सासेर ला (17,660 फीट) पर 8 किमी लंबी सुरंग के लिए भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिससे पूरे साल सड़क की सामरिक उपयोगिता बनी रहेगी।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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