चाय हमारी संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है। किसी के सम्मान का प्रतीक भी चाय है। जब कोई व्यक्ति चाय नहीं पिलाता तो लोग अक्सर कहते हैं, चाय तक तो पिलायी नहीं। चाय के बिना हमारी गुफ्तगू ही शुरू नहीं होती।
निश्चित तौर पर चाय उत्पादन के मामले में असम का नाम पहले नंबर पर आता है। असम की चाय देशभर में पी जाती है और दुनिया के अन्य देशों में एक्सपोर्ट भी होती है। देश के कुल चाय उत्पादन का आधा आसाम में ही होती है। (Photo - Incredible North East India)
चाय उत्पादन के मामले में पश्चिम बंगाल का नंबर दूसरा है। दार्जिलिंग की चाय अपने स्वाद और अरोमा के लिए जानी जाती है। दार्जिलिंग की चाय को 'शैंपेन ऑफ टीज' का दर्जा हासिल है। (Photo - PTI)
तमिलनाडु में नीलगिरी की पहाड़ियों में बड़ी मात्रा में चाय का उत्पादन होता है। यहां की चाय का अपना ही एक अलग फ्लेवर है। तमिलनाडु से बड़ी मात्रा में चाय विदेशों को एक्सपोर्ट की जाती है। यहां ग्रीन-टी का उत्पादन काफी ज्यादा होता है। (Photo - Tourism of India)
चाय उत्पादन के मामले में केरल भले ही आसाम और पश्चिम बंगाल को टक्कर नहीं दे पाता है, लेकिन यह चाय उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। यहां भी हजारों हेक्टेयर में चाय के बागान हैं। (Photo - INDIA Trotter)
पश्चिमी घाट के कोडागू और चिकमंगलूर में चाय के बागान हैं। यहां पर खास स्वाद की चाय का उत्पादन होता है। चाय के शौकीनों के बीच कर्नाटक की चाय का अलग महत्व है। यहां की चाय की खपत ज्यादातर देश में ही हो जाती है। (Photo - Karnataka.com)
हिमाचल के कांगड़ा, पालमपुर, धर्मशाला और मैक्लोडगंज जैसी जगहों पर चाय के बागान हैं। यहां की चाय में आयुर्वेदिक गुणों के साथ ही बेहतरीन क्वालिटी, अरोमा और फ्रूटी फ्लेवर भी होता है। कांगड़ा की हर्बल-टी भी मशहूर है। (Photo - IndiaMart)
राज्य का अपना चाय ब्रांड उत्तरांचल-टी नाम से है, जिसे दक्षिण कोरिया, जापान, जर्मनी, अमेरिका और नीदरलैंड्स जैसे देशों में एक्सपोर्ट किया जाता है। राज्य में बेरीनाग, घोड़ाखाल, नौटी, कौसानी में चाय के बागान हैं। (Photo - Uttarakhand Tea Development Board)