बिहार के सीतामढ़ी जिले के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में फाइनल ईयर की एक छात्रा की मौत के बाद कॉलेज परिसर में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस घटना को लेकर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कॉलेज प्रशासन, विशेषकर प्राचार्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी कर मृतक छात्रा को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।
कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
छात्रों के अनुसार, 23 जनवरी को छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। वह कॉलेज के हॉस्टल में रह रही थी, लेकिन गंभीर हालत के बावजूद कॉलेज प्रशासन ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाने में लापरवाही बरती। छात्रों का आरोप है कि समय रहते न तो एंबुलेंस बुलाई गई और न ही कोई वैकल्पिक त्वरित चिकित्सा व्यवस्था की गई।प्राचार्य की गाड़ी से छात्रा को उतारा
मामला उस वक्त और गंभीर हो गया, जब छात्रों ने प्रशासन पर अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाया। छात्रों का कहना है कि जब छात्रा की हालत ज्यादा बिगड़ने पर उसे प्राचार्य की चार पहिया गाड़ी से अस्पताल ले जाया जा रहा था, तो रास्ते में यह कहकर उसे वाहन से उतार दिया गया कि गाड़ी गंदी हो जाएगी। छात्रों के मुताबिक इसी देरी ने छात्रा की जान ले ली।
भागलपुर की रहने वाली थी छात्रा
बताया जा रहा है कि मृतक छात्रा बिहार के भागलपुर जिले की रहने वाली थी और इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की छात्रा थी। समय पर बेहतर इलाज न मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। इस घटना से कॉलेज के छात्रों में गहरा आक्रोश है और वे इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला बता रहे हैं। घटना के बाद कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर भारी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके। इसके बावजूद छात्रों का धरना-प्रदर्शन जारी है।
