पश्चिम एशिया (Middle East) में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के तेल बाजार में हलचल मचा दी है। युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल बनाना महंगा हो गया है। इस वैश्विक संकट का फायदा कुछ अंतरराष्ट्रीय कारोबारी उठा रहे थे, जो भारत से सस्ता ईंधन खरीदकर विदेशी बाजारों में ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे थे। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने अब एक बड़ा कदम उठाया है। अब भारत से बाहर भेजे जाने वाले हर लीटर डीजल पर ₹21.5 रुपए और
एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी
भारत सरकार ने देश से निर्यात (Export) होने वाले डीजल और हवाई जहाज के ईंधन (ATF) पर लगने वाली ड्यूटी में भारी इजाफा कर दिया है। अब भारत से बाहर भेजे जाने वाले प्रति लीटर डीजल पर ₹21.5 और प्रति लीटर एटीएफ (ATF) पर ₹29.5 की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा दी गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की तेल कंपनियां घरेलू जरूरतों को नजरअंदाज करके केवल मुनाफे के लिए सारा तेल विदेश न भेज दें। इस फैसले से घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर से घटाकर शून्य (NIL) कर दी गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा ऐलान
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने आम आदमी को बड़ी राहत देने के लिए एक 'बैलेंसिंग एक्ट' किया है। जहां एक तरफ निर्यात होने वाले तेल पर टैक्स बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू उपयोग वाले पेट्रोल और डीजल पर ₹10 प्रति लीटर की सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (Central Excise Duty) कम कर दी गई है। वित्त मंत्री के अनुसार, इस कटौती से आम जनता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बोझ से बड़ी राहत मिलेगी।
कितने दिन का स्टॉक?
सरकार ने आधिकारिक आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया है कि भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की सप्लाई का 'कॉन्ट्रैक्ट' पहले ही पक्का कर लिया है। हालांकि भारत की कुल स्टोरेज क्षमता 74 दिनों की है, लेकिन वर्तमान में 60 दिनों का वास्तविक स्टॉक पूरी तरह उपलब्ध है। इस बैकअप में कच्चा तेल और जमीन के नीचे बने रणनीतिक भंडारों (Strategic Reserves) में रखा 'इमरजेंसी' ईंधन भी शामिल है। खास बात यह है कि मिडिल ईस्ट संकट के 27 दिन बीतने के बाद भी भारत ने अगले 2 महीनों की तेल खरीद को सुरक्षित रखा है। इसी का नतीजा है कि देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप बिना किसी रुकावट के काम कर रहे हैं।
