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Diwali से ऑनलाइन शॉपिंग होगी महंगी? क्या है डिलीवरी पर 5% GST के दावे का सच?

दिवाली से पहले UPI MDR पर भले ही राहत मिल गई है। लेकिन, अब दिवाली पर ऑनलाइन शॉपिंग महंगी होने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि ई-कॉमर्स ऑर्डर की डिलीवरी पर GST लगाने का दावा किया जा रहा है?

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जीएसटी में बदलाव के प्रस्ताव अभी लागू नहीं

5% GST On Online Shopping Deliveries : दिवाली से पहले ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के बीच 5% GST को लेकर भ्रम फैल रहा है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली डिलीवरी पर नया 5% गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) लगा दिया है। इससे फूड डिलीवरी ऐप, ऑनलाइन शॉपिंग और घर तक सामान पहुंचाने वाली सेवाओं के बिल बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, यह दावा आधा अधूरा है। क्योंकि, GST Council ने 5% GST के टैक्स का प्रस्ताव तो रखा है। लेकिन, इसे अभी लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा सरकार ने कुछ डिलीवरी सेवाओं के लिए GST दर को 18% से घटाकर 5% करने की बात कही है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने स्पष्ट किया है कि यह नया टैक्स लगाने का मामला नहीं, बल्कि GST दरों को तर्कसंगत बनाने से जुड़ा बदलाव है। इसके पीछे 8 अक्टूबर 2026 को हुई GST Council की 57वीं बैठक की सिफारिशें हैं।

5% GST पर क्या है सरकार की सफाई?

सोशल मीडिया पर वायरल दावे के मुताबिक, दिवाली से पहले ऑनलाइन ऑर्डर करने पर ग्राहकों को अब 5% अतिरिक्त GST देना होगा। इस दावे पर PIB Fact Check ने CBIC की सफाई साझा की है। सरकार के मुताबिक, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दी जाने वाली संबंधित डिलीवरी सेवाओं पर GST दर को 18% से घटाकर 5% करने की व्यवस्था की गई है। ऐसे में इसे ग्राहकों पर लगाया गया नया टैक्स बताना भ्रामक है।

यहां एक जरूरी फर्क समझना होगा। GST Council ने 5% GST बिना Input Tax Credit (ITC) की दर की सिफारिश की है। संबंधित प्रावधानों के दायरे में आने वाली सेवाओं के लिए यह व्यवस्था है, न कि हर ऑनलाइन ऑर्डर पर अलग से 5% टैक्स लगाने का फैसला।

किन डिलीवरी सेवाओं पर लागू होगा 5% GST?

GST Council की 57वीं बैठक में ई-कॉमर्स ऑपरेटर के माध्यम से दी जाने वाली कुछ डिलीवरी सेवाओं के लिए 5% GST बिना ITC की सिफारिश की गई। इसमें दो प्रमुख स्थितियां शामिल हैं।

पहली, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दी जाने वाली ऐसी डिलीवरी सेवाएं, जिनके सेवा प्रदाता को CGST Act की धारा 22(1) के तहत GST रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं है। ऐसी सेवाओं को धारा 9(5) के दायरे में लाने और उन पर 5% GST लागू करने की सिफारिश की गई है।

दूसरी, ऐसे सामान की डिलीवरी सेवाएं, जिन्हें ई-कॉमर्स ऑपरेटर के जरिए बेचा या ऑर्डर किया गया है। इन सेवाओं के लिए भी 5% GST बिना ITC की सिफारिश है।

कूरियर और पोस्टल सेवाओं पर लागू नहीं

हालांकि, कूरियर और पोस्टल सेवाओं को इस विशेष व्यवस्था से अलग रखा गया है। इसलिए सभी कूरियर कंपनियों, स्थानीय डिलीवरी सेवाओं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर होने वाली हर तरह की सप्लाई के लिए एक ही दर मान लेना गलत होगा।

GST कौन चुकाएगा?

GST काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि GST चुकाने की जिम्मेदारी सेवा प्रदाता की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि डिलीवरी सेवा देने वाले व्यक्ति को GST में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं है, तो संबंधित ई-कॉमर्स ऑपरेटर धारा 9(5) के तहत टैक्स चुकाने के लिए जिम्मेदार होगा। दूसरी ओर, यदि डिलीवरी सेवा प्रदाता GST रजिस्ट्रेशन के लिए बाध्य है, तो लागू प्रावधानों के अनुसार टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी उसी की होगी। यह अंतर इसलिए अहम है, क्योंकि ग्राहक को दिखने वाले डिलीवरी चार्ज और सरकार को टैक्स जमा करने की कानूनी जिम्मेदारी दो अलग-अलग बातें हैं।

बिना ITC के 5% GST का क्या मतलब है?

यहां Input Tax Credit यानी ITC को समझना भी जरूरी है। सामान्य तौर पर, कारोबार में खरीदी गई वस्तुओं या सेवाओं पर चुकाए गए GST का क्रेडिट निर्धारित शर्तों के तहत लिया जा सकता है। लेकिन 5% GST बिना ITC का मतलब है कि संबंधित सेवा पर लागू नियमों के तहत सेवा प्रदाता को इनपुट टैक्स का क्रेडिट लेने की सुविधा नहीं मिलेगी। इसका असर डिलीवरी सेवा देने वाली कंपनियों की लागत और बिलिंग व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए केवल GST की दर घटने के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर ग्राहक का डिलीवरी चार्ज भी उसी अनुपात में घट जाएगा।

क्या दिवाली पर ऑनलाइन शॉपिंग महंगी होगी?

ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि क्या अब हर ऑनलाइन ऑर्डर पर 5% ज्यादा भुगतान करना होगा। GST Council की सिफारिश और संबंधित अधिसूचना के जरिए उसके लागू होने की तारीख के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। परिषद की आधिकारिक विज्ञप्ति में इन बदलावों को सिफारिशों तथा प्रस्तावित प्रावधानों के रूप में बताया गया है। इसलिए इनके लागू होने की अधिसूचना अलग से जारी होगी। यानी सीधा मतलब यह है कि इन बदलावों को अभी लागू नहीं किया गया है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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