Aluminium Foil : भारत सरकार देश के घरेलू उद्योगों को विदेशी कंपनियों के अनुचित व्यापार से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने चीन, थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया से भारत आने वाले 'एल्युमीनियम फॉयल' पर डंपिंग-रोधी शुल्क (Anti-Dumping Duty) को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की सिफारिश की है। यह सिफारिश 80 माइक्रोन या उससे कम मोटाई वाले एल्युमीनियम फॉयल पर लागू होगी। DGTR की जांच में पाया गया कि इन देशों से बेहद सस्ते दामों पर माल भारत भेजा जा रहा है, जिससे भारतीय कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
क्या होता है एल्युमीनियम फॉयल और क्यों पड़ी इस पर शुल्क की जरुरत?
एल्युमीनियम फॉयल धातु की बेहद पतली और लचीली शीट होती है, जिसका उपयोग हम आमतौर पर घरों और होटलों में खाना पैक करने, दवाइयों की पैकिंग और कॉस्मेटिक सामान को सुरक्षित रखने के लिए करते हैं। जब कोई विदेशी देश अपने यहां बनने वाले इस सामान को असली लागत से भी कम कीमत पर भारतीय बाजार में बेचने लगता है, तो इसे 'डंपिंग' कहा जाता है। इस सस्ते आयात के कारण भारत की स्थानीय कंपनियां प्रतिस्पर्धा नहीं कर पातीं और उनका कारोबार ठप होने लगता है। इसी नुकसान से भारतीय उद्योगों को सुरक्षा देने के लिए सरकार आयातित सामान पर अतिरिक्त कर यानी 'डंपिंग-रोधी शुल्क' लगाती है।
भारतीय कंपनियों की शिकायत पर शुरू हुई जांच
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक भारत में एल्युमीनियम फॉयल बनाने वाली प्रमुख कंपनियों जैसे हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, रविराज फॉयल्स, एलएसकेबी एल्युमीनियम फॉयल्स, श्री वेंकटेश्वर इलेक्ट्रोकास्ट, श्याम सेल एंड पावर और एसआरएफ अल्टेक ने सरकार से इस मामले की शिकायत की थी। इन कंपनियों ने DGTR से कहा था कि विदेश से आ रहे सस्ते फॉयल के कारण उनका मुनाफा गिर रहा है और बाजार में बने रहना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद DGTR ने पूरे मामले की गहन समीक्षा की और सभी संबंधित पक्षों के तर्कों को सुना।
थाईलैंड और चीन से खतरा बरकरार
DGTR की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि पहले से शुल्क लागू होने के बावजूद थाईलैंड जैसे देशों से भारी मात्रा में सस्ता एल्युमीनियम फॉयल भारत आ रहा है। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह आशंका भी जताई गई कि अगर डंपिंग-रोधी शुल्क को हटाया गया, तो चीन के निर्यातक एक बार फिर भारतीय बाजार में भारी मात्रा में अपना सस्ता सामान डंप करने लगेंगे। इससे घरेलू कंपनियों की कमाई और व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इसी आधार पर DGTR ने 93.53 डॉलर से लेकर 976.99 डॉलर प्रति टन के हिसाब से शुल्क को अगले पांच साल तक जारी रखने की सलाह दी है।
वित्त मंत्रालय लेगा अंतिम फैसला
भारत सरकार ने सबसे पहले सितंबर 2021 में इस उत्पाद पर पांच साल के लिए डंपिंग रोधी शुल्क लगाया था। अब DGTR द्वारा की गई इस नई सिफारिश के आधार पर अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय को लेना है। अगर वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है, तो अगले पांच सालों तक इन चार एशियाई देशों से आने वाले एल्युमीनियम फॉयल पर यह अतिरिक्त टैक्स लागू रहेगा। भारत सरकार लगातार चीन और अन्य देशों से होने वाले अनुचित आयात को रोकने के लिए कई उत्पादों पर इस तरह के कदम उठाती रही है ताकि 'मेक इन इंडिया' और स्थानीय निर्माताओं को मजबूती मिल सके।
