Crude Oil Price : पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में उठापटक का दौर आने वाले सप्ताह में भी जारी रहने की पूरी आशंका है। इस भू-राजनीतिक तनाव की वजह से वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति बाधित होने की गहरी चिंता बनी हुई है। बाजार के जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में 120 डॉलर (करीब 11393 रुपये) प्रति बैरल के करीब पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले भी वैश्विक बाजार की दिशा तय करने में एक बहुत बड़ी और अहम भूमिका निभाएंगे। वर्तमान में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुकी है। इस परिस्थिति में निवेशकों और कारोबारियों की पैनी नजरें कई अहम घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं। इनमें मुख्य रूप से सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात, ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर किसी भी संभावित हमले की आशंका और अमेरिका के साप्ताहिक भंडार के आंकड़े शामिल हैं। बाजार इन सभी कारकों का बारीकी से आकलन कर रहा है क्योंकि ये सीधे तौर पर तेल की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
साप्ताहिक भंडार आंकड़े और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजरें
विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने में अमेरिकी डेटा और नीतिगत बैठकों का बहुत बड़ा हाथ होगा। अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान (API) और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) जल्द ही कच्चे तेल के अपने साप्ताहिक भंडार के नए अनुमान जारी करने वाले हैं। इसके अलावा, ओक्लाहोमा स्थित कुशिंग में कच्चे तेल के भंडारण की स्थिति और 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक भी निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। इन बैठकों से मिलने वाले संकेतों पर दुनियाभर के शेयर और जिंस बाजारों की नजर है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक प्रसिद्ध ब्रोकरेज फर्म रेलिगेयर ब्रोकिंग में वरिष्ठ उपाध्यक्ष-शोध, अजित मिश्रा का इस बारे में कहना है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों का रुख तेजी की ओर इशारा कर रहा है। हालांकि, यह पूरी तरह से वैश्विक स्तर पर आने वाली ताजा खबरों और घटनाक्रमों से प्रभावित होगा। उन्होंने कारोबारियों को सलाह दी है कि उन्हें कीमतों में होने वाली अचानक और तेज बढ़त के पीछे आंख मूंदकर भागने से बचना चाहिए। बाजार की सही दिशा और स्थिरता की पुष्टि के लिए वैश्विक खबरों, फेडरल रिजर्व के बयानों और साप्ताहिक भंडार के आंकड़ों का गहराई से इंतजार और अध्ययन करना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य और सप्लाई चेन पर मंडराता खतरा
ऊर्जा बाजार के जानकारों का यह भी मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति और अधिक बिगड़ती है, तो इसका सीधा असर परिवहन और आपूर्ति पर पड़ेगा। ऊर्जा के बुनियादी ढांचे या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री तेल परिवहन में अगर किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत उछलकर आसानी से 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकती है। इसके विपरीत, यदि तनाव को कम करने की दिशा में कोई ठोस कूटनीति या प्रगति होती है, तो इन बढ़ी हुई कीमतों में भारी और तेज गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में जिंस शोध प्रमुख, नवनीत दमानी ने इस स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और सऊदी अरब के आसपास के इलाकों में हमलों की तीव्रता बढ़ने से एक बार फिर पूरे बाजार का ध्यान ऊर्जा के बुनियादी ढांचे और निर्यात की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताओं पर केंद्रित हो गया है। आपूर्ति सुरक्षा को लेकर यह अनिश्चितता बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण बनी हुई है।
भू-राजनीतिक तनाव और आगामी चुनावों का प्रभाव
कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाने में कुछ अन्य राजनीतिक खबरों ने भी आग में घी का काम किया है। हाल ही में सामने आई कुछ रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल द्वारा आगामी तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के प्रमुख ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजना बनाई जा रही है। इस संभावित योजना में नतांज के पास स्थित संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठान भी शामिल बताए जा रहे हैं। इन खबरों के सार्वजनिक होने के बाद से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता का माहौल और अधिक गहरा गया है। विश्लेषकों का साफ तौर पर मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में जारी कूटनीतिक और सैन्य तनाव पूरी तरह से शांत नहीं होता, तब तक कच्चे तेल के बाजार में भारी अस्थिरता और ऊंचे दाम बने रहने की पूरी संभावना है।
