केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों की शिकायतों को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार एक सप्ताह के भीतर उच्चस्तरीय संयुक्त समिति का गठन करेगी। इस समिति में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ किसान संगठन, चीनी मिलों के प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और वैज्ञानिक शामिल होंगे। सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों और किसान संगठनों के बीच करीब तीन घंटे तक चली बैठक में यह फैसला लिया गया।
शिवराज सिंह चौहान और प्रह्लाद जोशी ने की किसानों से बात
PTI/भाषा के मुताबिक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने दिल्ली के पूसा परिसर में महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की। बैठक में विभिन्न किसान संगठनों के करीब 80 से 90 प्रतिनिधि और दोनों राज्यों के मंत्री भी मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य उद्देश्य गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान निकालना और चीनी मिलों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना था।
गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग
2026-27 का चीनी सत्र 1 अक्टूबर से शुरू हो चुका है और चीनी मिलों में गन्ने की पेराई भी जारी है। इसी बीच किसानों ने बढ़ती उत्पादन लागत का हवाला देते हुए गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग उठाई है। इसके अलावा किसानों ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) मौजूदा 31 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि लागत बढ़ने के बीच उचित कीमत मिलना जरूरी है।
रिकवरी और वजन में गड़बड़ी पर सरकार सख्त
बैठक में चीनी मिलों की ओर से बताई जाने वाली चीनी रिकवरी दर में विसंगतियों, गन्ने के वजन में कटौती, वास्तविक रिकवरी के आंकड़ों, बर्बादी और प्रयोगशाला में जांच जैसे मुद्दे उठे। फसल बीमा से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा हुई।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि अन्नदाता किसानों का शोषण किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान टुकड़ों में करने के बजाय पारदर्शी और वैज्ञानिक व्यवस्था बनाना जरूरी है, ताकि किसानों के अधिकार सुरक्षित रहें।
समिति की रिपोर्ट पर रहेंगी किसानों की नजरें
प्रस्तावित समिति इन शिकायतों की जांच और समाधान के लिए काम करेगी। इसमें दोनों राज्यों की सरकारों, किसान संगठनों और चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के साथ विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे। अब किसानों की नजर समिति के गठन और उसकी कार्रवाई पर रहेगी। हालांकि, गन्ने के समर्थन मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी पर अभी कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं किया गया है।
