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Sensex 750 अंक टूटा, Nifty 25,050 के करीब फिसला, ये हैं बाजार गिरने की 5 बड़ी वजहें

शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआती तेजी टिक नहीं पाई और दोपहर तक सेंसेक्स-निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गए। कारोबार के दौरान Sensex करीब 750 अंक टूटकर 81,560 के आसपास आ गया, जबकि Nifty 25,050 के करीब ट्रेड करता दिखा। इससे एक दिन पहले शेयर बाजार में हल्की रिकवरी देखने को मिली थी।

Share Market Falling

बजार में बड़ी गिरावट

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार 23 जनवरी को शुरुआती तेजी के बाद दोपहर बाद बड़ी गिरावट आई है। दिन की शुरुआत पॉजिटिव होने के बाद मुनाफावसूली और लगातार विदेशी बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स-निफ्टी दोनों लाल निशान में आ गए। दोपहर करीब 1:40 बजे Sensex 744 अंक (करीब 0.9%) गिरकर 81,562 के आसपास ट्रेड कर रहा था। वहीं Nifty 228 अंक (करीब 0.9%) टूटकर 25,062 के करीब फिसल गया। इस दौरान निफ्टी ने 25,347 का हाई और 25,043.85 का लो छुआ। बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही, जहां गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़त वाले शेयरों से ज्यादा रही।

गिरावट के पांच बड़े कारण

1. FII आउटफ्लो

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली का रहा। गुरुवार को FIIs ने 2,549.80 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जनवरी में यह उनकी 13वीं लगातार नेट सेलिंग रही। इस महीने FIIs केवल 2 जनवरी को नेट खरीदार रहे थे। Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ वीके विजयकुमार के मुताबिक, FIIs का रुख आगे चलकर भारत की कॉरपोरेट अर्निंग्स ग्रोथ पर निर्भर करेगा। अगर कमाई की रफ्तार मजबूत नहीं होती तो FIIs सस्ती वैल्यूएशन और बेहतर अर्निंग्स वाले दूसरे बाजारों में शिफ्ट हो सकते हैं। उनका यह भी कहना है कि FIIs हर पॉजिटिव खबर पर आने वाली तेजी में शॉर्ट पोजिशन बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में कोई हेल्दी रैली बनने से पहले ही दबाव आ जाता है।

2. कमजोर तिमाही नतीजे

मार्केट की गिरावट के पीछे दूसरा बड़ा कारण Q3 नतीजों की सुस्ती रही। खासतौर पर इंडेक्स हैवीवेट शेयरों में कमजोर/उम्मीद से कम प्रदर्शन ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला। ICICI Bank और HCL Technologies जैसे बड़े शेयरों के नतीजों ने बाजार में दबाव बढ़ाया। जब हैवीवेट स्टॉक्स कमजोर होते हैं तो उनका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर दिखता है, क्योंकि इंडेक्स की चाल इन्हीं बड़े शेयरों से तय होती है।

3. क्रूड ऑयल

बाजार की चाल पर क्रूड ऑयल भी बड़ा फैक्टर रहा। ग्लोबल बेंचमार्क Brent crude 0.8% चढ़कर 64.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मतलब होता है कि इससे ट्रेड डेफिसिट बढ़ने का खतरा बढ़ेगा। इसके अलावा महंगाई का दबाव भी बढ़ेगा, जिससे सरकार के लिए फिस्कल मैनेजमेंट चुनौतीपूर्ण हो जाएगा और आखिर में यह बाजार के लिए नेगेटिव सेंटिमेंट होता है। यही वजह है कि क्रूड में उछाल आते ही इक्विटी में खरीदारी कमजोर पड़ जाती है।

4. जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता

गुरुवार को बाजार करीब 0.5% की बढ़त के साथ बंद हुआ था और तीन दिन की गिरावट पर ब्रेक लगा था। इसकी वजह यह रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ संकेतों से जियोपॉलिटिकल टेंशन थोड़ी कम होती दिखी। ट्रंप ने यूरोप के खिलाफ टैरिफ स्टांस में नरमी के संकेत दिए और ग्रीनलैंड को लेकर फोर्स के इस्तेमाल की बात से भी पीछे हटे। इससे शॉर्ट टर्म में बाजार को राहत मिली। लेकिन निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार इस हफ्ते अब भी करीब 1.5% नीचे बना हुआ है। साथ ही, लंबे समय के लिए ट्रांस-अटलांटिक रिलेशन (US-Europe संबंध) को लेकर सवाल उठे हैं। Reuters के मुताबिक, ट्रंप के पुराने बयानों और धमकियों ने यूरोप की अमेरिका के साथ पारंपरिक साझेदारी को लेकर भरोसा कमजोर किया है।

5. अडानी-अंबानी के शेयरों पर दबाव

बाजार में गिरावट को और बढ़ाने वाला एक बड़ा ट्रिगर मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और Adani Group के शेयरों में बिकवाली रही। US सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अमेरिकी कोर्ट से अनुमति मांगी है कि वह अरबपति गौतम अदाणी और ग्रुप एग्जीक्यूटिव सागर अदाणी को कथित धोखाधड़ी और 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत योजना से जुड़े मामले में व्यक्तिगत तौर पर ईमेल के जरिए समन भेज सके। वहीं, दूसरी तरफ रिलायंस इंडस्ट्रीज को लेकर खबर आई है कि फिर से रूसी तेल खरीदना शुरू कर सकती है।

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यतींद्र लवानिया
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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