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New Labour Code: नए लेबर कानून से बड़ा बदलाव, पूरे देश में छुट्टियों को लेकर एक जैसे नियम, इन कर्मचारियों को मिलेगा ये हक!

New Labour Code: नई श्रम संहिता के तहत OSH&WC Code 2020 लागू होगा, जिससे छुट्टी और लीव एनकैशमेंट के नियम पूरे देश में एक जैसे, आसान और पारदर्शी बनाए जाएंगे। यहां विस्तार से जानिए क्या-क्या बदलाव होंगे।

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Photo : iStock
नए श्रम कानून में कर्मचारियों को मिलेगा सीधा फायदा! (तस्वीर-istock)
Authored by: Ramanuj Singh
Updated Apr 11, 2026, 12:02 IST
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New Labour Code: भारत में श्रम कानूनों को सरल और एक जैसा बनाने के लिए सरकार ने नई श्रम संहिताएं (Labour Codes) तैयार की हैं। इन्हीं में से एक है Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSH&WC) Code 2020 । इस नए कानून का उद्देश्य देशभर में अलग-अलग राज्यों में लागू पुराने और जटिल नियमों को हटाकर एक समान व्यवस्था बनाना है, ताकि कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए नियम स्पष्ट और आसान हो सकें। हालांकि यह कानू (New Labour Law)न अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है क्योंकि कई राज्यों ने इसके लिए अपने नियम अभी तक अधिसूचित नहीं किए हैं। उम्मीद है कि इसे 21 नवंबर 2025 के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। तो आइए जानते हैं छुट्टी (Leave) और लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) के नियमों में क्या बदलाव हुआ है?

छुट्टी (Leave) के नियमों में क्या बदलाव हुआ?

नए लेबर कोड में कर्मचारियों की अर्जित छुट्टी (Earned Leave) को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब पूरे देश में एक समान नियम लागू करने की कोशिश की गई है। नए नियमों के मुताबिक हर 20 दिन काम करने पर 1 दिन की अर्जित छुट्टी (Earned Leave) मिलेगी। अधिकतम 30 दिन की छुट्टी अगले साल के लिए आगे बढ़ाई जा सकेगी। 30 दिन से ज्यादा छुट्टी जमा होने पर उसका कैश भुगतान (Encashment) किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि कर्मचारी अपनी जरुरत से ज्यादा जमा छुट्टी को पैसे में बदल सकते हैं।

लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) क्या होता है?

लीव एनकैशमेंट का मतलब है कि अगर किसी कर्मचारी के पास बची हुई छुट्टियां हैं, तो वह उन्हें इस्तेमाल करने की बजाय उनके बदले पैसे ले सकता है। नए कानून के अनुसार 30 दिन से ज्यादा जमा छुट्टियां होने पर उनका भुगतान मिलेगा। कर्मचारी हर साल अपनी जमा छुट्टियों का नकद भुगतान मांग सकता है। नौकरी छोड़ने पर भी इसका हिसाब साफ तरीके से किया जाएगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह व्यवस्था कर्मचारियों के लिए ज्यादा पारदर्शी और फायदेमंद है।

किन कर्मचारियों को मिलेगा यह लाभ?

यह लाभ सभी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा। यह सिर्फ उन लोगों पर लागू होगा जिन्हें कानून के अनुसार “वर्कर” (Worker) माना जाता है। इसके अंतर्गत शामिल हो सकते हैं, फैक्ट्री कर्मचारी, कॉन्ट्रैक्ट वर्कर (Contract Workers), फिक्स्ड टर्म कर्मचारी (Fixed-term Workers), लेकिन कुछ लोग इस दायरे से बाहर होंगे, जैसे मैनेजरियल (प्रबंधकीय) पदों पर काम करने वाले कर्मचारी, प्रशासनिक (Administrative) भूमिका वाले कर्मचारी, ऐसे सुपरवाइजरी कर्मचारी जिनकी सैलरी ₹18,000 प्रति माह से अधिक है। इसका मतलब यह है कि सभी कर्मचारियों को यह लाभ नहीं मिलेगा, यह उनकी नौकरी की प्रकृति पर निर्भर करेगा।

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पहले क्या नियम थे?

नई श्रम संहिता लागू होने से पहले छुट्टियों के नियम पूरे देश में एक जैसे नहीं थे। हर राज्य के अपने अलग कानून थे जैसे Shops & Establishments Act, Factories Act, 1948 कानूनों के कारण नियमों में काफी अंतर था। उदाहरण के लिए कुछ राज्यों में 45 से 60 दिन तक छुट्टी जमा करने की अनुमति थी। कुछ राज्यों में कम सीमा थी। कहीं पर छुट्टी का पैसा नौकरी छोड़ने पर मिलता था, कहीं सेवा के दौरान भी मिलता था। इस वजह से पूरे देश में एक समान व्यवस्था नहीं थी और कर्मचारियों के बीच असमानता भी देखी जाती थी।

अब क्या बदल गया है?

नई श्रम संहिता लागू होने के बाद पूरे देश में एक जैसा सिस्टम लागू करने की कोशिश की गई है। मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:-

  • छुट्टी जमा करने की सीमा तय: अब कोई भी कर्मचारी अधिकतम 30 दिन तक की छुट्टी ही अगले साल के लिए जमा कर सकेगा।
  • छुट्टी कमाने का एक जैसा नियम: हर 20 दिन काम करने पर 1 दिन की छुट्टी मिलेगी, चाहे कर्मचारी किसी भी राज्य में हो।
  • लीव एनकैशमेंट में स्पष्टता: अब यह साफ कर दिया गया है कि 30 दिन से ज्यादा छुट्टी होने पर उसका भुगतान किया जाएगा।
  • राज्य के अलग-अलग नियम खत्म करने की कोशिश: पहले अलग-अलग राज्यों में अलग नियम थे, अब उन्हें एक समान करने की दिशा में काम किया गया है।

इस बदलाव का उद्देश्य नियमों को सरल और पारदर्शी बनाना है, हालांकि कुछ जगहों पर इससे छुट्टी जमा करने की सीमा कम भी हो सकती है।

अगर छुट्टी मंजूर न हो तो क्या होगा?

नए नियमों में कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखते हुए एक महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है। अगर कोई कर्मचारी छुट्टी के लिए आवेदन करता है और उसका नियोक्ता (Employer) उसे मंजूर नहीं करता, तो वह छुट्टी खत्म नहीं होगी। वह छुट्टी आगे बिना किसी सीमा के जोड़ दी जाएगी बाद में इसका कैश भुगतान भी लिया जा सकता है। इस नियम का उद्देश्य यह है कि कंपनियां मनमाने तरीके से छुट्टी रोक न सकें।

एक्सपर्ट्स की राय

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कानून कर्मचारियों के लिए काफी लाभकारी है, लेकिन अभी यह पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। क्योंकि कई राज्यों ने अभी अपने नियम (State Rules) नहीं बनाए हैं। जब तक राज्य नियम नहीं बनाते, तब तक इसे लागू नहीं किया जा सकता है इसलिए यह फिलहाल चरणबद्ध प्रक्रिया में है। एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि जब यह पूरी तरह लागू होगा, तो देश में नौकरी और छुट्टी के नियम अधिक स्पष्ट और एक जैसे हो जाएंगे।

नई श्रम संहिता का उद्देश्य भारत में कामकाजी नियमों को आसान, पारदर्शी और एक जैसा बनाना है। छुट्टी और लीव एनकैशमेंट के नए नियमों से कर्मचारियों को यह फायदा होगा कि उनकी छुट्टियां ज्यादा व्यवस्थित होंगी। अतिरिक्त छुट्टियों का पैसा मिल सकेगा। नियम राज्यों के हिसाब से अलग-अलग नहीं रहेंगे। हालांकि अभी यह कानून पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, लेकिन लागू होने के बाद यह भारत के श्रम ढांचे में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

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