अभी तक हम यही सोच रहे थे कि ईरान और मिडिल ईस्ट की जंग सिर्फ पेट्रोल-डीजल या गैस सिलेंडर को महंगा करेगी, लेकिन अब यह महंगाई आपकी प्यास तक पहुंच चुकी है। जी हां, रसोई और गाड़ी के बाद अब आपकी मेज पर रखी पानी की बोतल भी जंग की आग की लपेट में आ गई है और तपकर महंगी हो गई है। देश की दिग्गज पानी कंपनियों ने बोतलबंद पानी की कीमतों में 11 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है। साफ़ पानी पीने के लिए भारत जैसे देश में बोतलबंद पानी का महंगा होना आम आदमी की जेब पर एक बड़ा 'वॉटर स्ट्राइक' है।
क्यों बढ़ीं पानी की कीमतें
मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध का असर भारत के पांच अरब डॉलर के बोतलबंद पानी के बाजार पर साफ दिखने लगा है। बिसलेरी, कोका-कोला, पेप्सी, रिलायंस और टाटा जैसी बड़ी कंपनियों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच अब कीमतों को बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है। इस महंगाई की सबसे बड़ी वजह कच्चा तेल (Crude Oil) है। दरअसल, प्लास्टिक की बोतलें और उनके ढक्कन बनाने के लिए 'पॉलिमर' की जरूरत होती है, जो कच्चे तेल से बनता है। युद्ध के कारण तेल महंगा हुआ, जिससे पॉलिमर की लागत बढ़ गई और देखते ही देखते प्लास्टिक की बोतलों और ढक्कनों के दाम आसमान छूने लगे। इसका सीधा बोझ अब कंपनियों ने ग्राहकों के कंधों पर डाल दिया है।
किसकी कितनी हिस्सेदारी?
भारत की सबसे बड़ी पानी कंपनी बिसलेरी (Bisleri), जिसकी बाजार में एक-तिहाई हिस्सेदारी है, उसने कीमतों में सीधे 11 फीसदी का इजाफा कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब एक लीटर पानी की 12 बोतलों वाले बॉक्स के लिए आपको 240 रुपये चुकाने होंगे, जबकि पहले इसके लिए सिर्फ 216 रुपये देने पड़ते थे। मीडिया रिपोर्ट्स में बिसलेरी के सीईओ एंजेलो जॉर्ज के हवाले से बताया गया है कि पैकेजिंग मटेरियल की लागत में पिछले 15 दिनों में 70 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिसे झेलना अब किसी के बस में नहीं रहा। सिर्फ बिसलेरी ही नहीं, बल्कि पार्ले एग्रो के 'बैली' और 'क्लियर प्रीमियम वॉटर' जैसे ब्रांड्स ने भी अपनी कीमतों में 8 से 11 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है।
बोतल बनाने का सामान भी हुआ महंगा
हैरानी की बात यह है कि प्लास्टिक की बोतलें बनाने वाली सामग्री अब 170 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जो पहले की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा है। यहाँ तक कि पानी की बोतल के ढक्कन, जो पहले सस्ते मिलते थे, उनकी कीमत अब दोगुनी होकर 45 पैसे प्रति पीस हो गई है। इतना ही नहीं, बोतलों को पैक करने वाले गत्ते के डिब्बे (Boxes), स्टिकर और टेप भी महंगे हो गए हैं। इस महंगाई ने सरकार के उस बड़े फैसले का असर भी खत्म कर दिया है, जिसमें सितंबर में बोतलबंद पानी पर टैक्स 18% से घटाकर 5% किया गया था। टैक्स कम होने से जो राहत ग्राहकों को मिलने वाली थी, वह अब युद्ध की वजह से बढ़ी हुई लागत की भेंट चढ़ गई है।
