Nifty valuation India: भारतीय शेयर बाजार में आई हालिया गिरावट के बाद वैल्यूएशन अब ठंडे पड़ते नजर आ रहे हैं। पिछले दो वर्ष में भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी के पीछे भारतीय बाजार खासतौर पर निफ्टी के हाई वैल्यूएशन को सबसे अहम वजह माना जा रहा था। फिलहाल, Nifty 50 का PE 19x पर आ चुका है, जो 10 के औसत 22.3x से काफी नीचे है। सवाल यह है कि क्या यह स्तर विदेशी निवेशकों को वापस आकर्षित करने के लिए पर्याप्त है या नहीं।
वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट
Nifty 50 का ट्रेलिंग PE 19.4x पर आ गया है, जो 5 साल के 22.6x और 10 साल के 22.3x औसत से नीचे है। कोविड के बाद पहली बार इंडेक्स 20x के नीचे आया है, जो बताता है कि बाजार में आई गिरावट ने वैल्यूएशन को काफी हद तक नॉर्मल कर दिया है।
एशियाई बाजारों से भी सस्ता
मौजूदा स्तरों पर भारत अब ताइवान, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई बाजारों के मुकाबले डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। यह बदलाव पिछले कुछ सालों में पहली बार दिख रहा है, जब भारतीय बाजार लगातार प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा था।
12% गिरावट ने बदला पूरा गणित
Nifty 50 अपने 52-वीक हाई 26,328 से करीब 12% गिर चुका है। इस गिरावट के पीछे वेस्ट एशिया तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कॉर्पोरेट अर्निंग्स में नरमी जैसे कारण रहे हैं, जिन्होंने मिलकर वैल्यूएशन को नीचे खींचा।
| बाजार / देश | इंडेक्स | PE (TTM) | ट्रेंड |
|---|---|---|---|
| भारत | Nifty 50 | 19.4x | कूलिंग |
| ताइवान | Taiwan Weighted Index | ~23x – 24x | प्रीमियम |
| जापान | Nikkei 225 | ~20x – 21x | मजबूत |
| दक्षिण कोरिया | KOSPI | ~20x | स्थिर |
| चीन | Shanghai Composite | ~12x – 13x | डिस्काउंट |
| हांगकांग | Hang Seng Index | ~10x – 11x | डीप डिस्काउंट |
| सिंगापुर | Straits Times Index | ~13x – 14x | स्थिर |
क्या FII की होगी वापसी
हालांकि, वैल्यूएशन आकर्षक हुए हैं, लेकिन सिर्फ सस्ता होना ही पर्याप्त नहीं है। विदेशी निवेशकों के लिए ग्लोबल मैक्रो, बॉन्ड यील्ड, डॉलर की मजबूती और जियोपॉलिटिकल जोखिम भी अहम फैक्टर हैं। जब तक इन मोर्चों पर स्थिरता नहीं आती, तब तक बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश की वापसी सीमित रह सकती है। Nifty का 19x PE निश्चित तौर पर राहत देने वाला है और बाजार को ओवरवैल्यूड टैग से बाहर निकालता है। लेकिन, विदेशी निवेशकों की मजबूत वापसी के लिए सिर्फ वैल्यूएशन नहीं, बल्कि ग्लोबल संकेतों में सुधार भी जरूरी होगा। फिलहाल बाजार ‘फेयर’ जोन में है, लेकिन निर्णायक मोड़ अभी बाकी है।
