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NEFT में इंतजार और UPI से पैसे ट्रांसफर, आखिर क्यों? आसान भाषा में समझिए

सब्जी की दुकान हो या ऑनलाइन शॉपिंग, UPI आज हमारी जिंदगी का हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पैसे को भेजने में पहले घंटों लगते थे, वो अब एक क्लिक पर कैसे पहुंच जाता है?

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आज के दौर में शायद ही कोई ऐसा स्मार्टफोन यूजर होगा जो UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) का इस्तेमाल न करता हो। सब्जी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह बस एक QR कोड स्कैन किया और पैसे ट्रांसफर! लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस NEFT ट्रांजेक्शन में पहले घंटों इंतजार करना पड़ता था, वही काम UPI कुछ ही सेकंड में कैसे कर देता है? आखिर इसके पीछे कौन सी टेक्नोलॉजी काम करती है जो बैंक की लंबी कतारों को आपकी उंगलियों पर ले आई है?

UPI आखिर है क्या?

UPI को 'नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया' (NPCI) ने विकसित किया है। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो आपके कई बैंक खातों को एक ही मोबाइल ऐप (जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm) से जोड़ देता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आपको पैसे भेजने के लिए सामने वाले का अकाउंट नंबर या IFSC कोड याद रखने की जरूरत नहीं होती। बस एक मोबाइल नंबर या एक वर्चुअल आईडी (VPA) ही काफी है।

UPI बनाम NEFT क्यों है यह इतना तेज?

NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) एक 'बैच प्रोसेसिंग' सिस्टम पर काम करता है। यानी, जब आप NEFT करते हैं, तो बैंक आपके ट्रांजेक्शन को एक कतार में लगा देता है और हर आधे घंटे में इन ट्रांजेक्शन को बैच में प्रोसेस किया जाता है। साथ ही, NEFT बैंकों के वर्किंग ऑवर्स पर भी निर्भर करता है। इसके विपरीत, UPI IMPS (इमीडिएट पेमेंट सर्विस) के ऊन्नत वर्जन पर काम करता है। यह रियल-टाइम सिस्टम है जो 24x7, साल के 365 दिन काम करता है। इसमें कोई बैच प्रोसेसिंग नहीं होती; जैसे ही आप 'Send' दबाते हैं, मैसेज तुरंत बैंक के सर्वर तक पहुंचता है और पैसा ट्रांसफर हो जाता है।

पर्दे के पीछे की प्रक्रिया

जब आप किसी को पैसे भेजते हैं, तो मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम होता है। सबसे पहले, आपका ऐप (जैसे भीम या फोनपे) आपके बैंक को एक 'रिक्वेस्ट' भेजता है। इसके बाद, NPCI का सेंट्रल सर्वर एक मध्यस्थ (Mediator) के रूप में काम करता है और यह सुनिश्चित करता है कि पैसा आपके खाते से कटकर सही व्यक्ति के बैंक खाते में पहुंचे। यह पूरी प्रक्रिया 'पुल' (Pull) और 'पुश' (Push) मैकेनिज्म पर आधारित है। सुरक्षा के लिए इसमें टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल होता है पहला आपका मोबाइल डिवाइस और दूसरा आपका गुप्त UPI पिन।

बिना बैंक डिटेल्स के पेमेंट का राज

UPI की सबसे क्रांतिकारी बात इसका 'वर्चुअल पेमेंट एड्रेस' (VPA) है। जब आप अपनी आईडी (जैसे abc@oksbi) बनाते हैं, तो NPCI के पास आपके बैंक खाते की मैपिंग हो जाती है। जब कोई आपके VPA पर पैसे भेजता है, तो सिस्टम को पता होता है कि यह VPA किस बैंक अकाउंट से लिंक है। इससे आपकी बैंकिंग गोपनीयता बनी रहती है और सुरक्षा भी बढ़ती है।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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