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10 हजार की मंथली SIP से 10 साल में मिलेगा कितना रिटर्न?

अगर आप भी 10 हजार की मंथली SIP करने का फैसला लेने जा रहे है तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। आइए आपको बताते हैं 10 साल में आप 10 हजार हर महीने बचा कर कितना रिटर्न पा सकते हैं?

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10 हजार की मंथली SIP से 10 साल में मिलेगा कितना रिटर्न?

आज के समय में अपनी गाढ़ी कमाई को सही जगह निवेश करना बेहद जरूरी हो गया है। पारंपरिक निवेश माध्यम जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या सेविंग अकाउंट में अब पहले जैसा मुनाफा नहीं मिलता, क्योंकि वहां मिलने वाला ब्याज लगातार बढ़ती महंगाई को मात देने में नाकाम साबित हो रहा है। ऐसे में म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की 'एसआईपी' यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) छोटे और मध्यम वर्ग के निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरी है। एसआईपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आपको एक साथ मोटी रकम लगाने की जरूरत नहीं होती। आप हर महीने अपनी सहूलियत के हिसाब से एक निश्चित राशि निवेश कर सकते हैं। बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि अगर वे हर महीने 10,000 रुपये की एक अनुशासित एसआईपी शुरू करते हैं, तो अगले 10 सालों में उन्हें अनुमानित तौर पर कितना रिटर्न या मैच्योरिटी अमाउंट मिल सकता है।

कितना मिलेगा रिटर्न?

जब आप हर महीने 10,000 रुपये की एसआईपी 10 साल (यानी 120 महीने) के लिए चलाते हैं, तो इस पूरी अवधि में आपकी जेब से कुल निवेशित रकम (Principal Amount) 12 लाख रुपये होगी। अब इस 12 लाख रुपये पर आपको कितना रिटर्न मिलेगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपके म्यूचुअल फंड ने सालाना आधार पर कैसा प्रदर्शन किया है। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में रिटर्न फिक्स नहीं होता, लेकिन अगर हम पिछले एक-दो दशकों के इतिहास और अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें, तो लंबी अवधि में ये फंड आसानी से 12% से 15% तक का सालाना औसत रिटर्न (CAGR) दे देते हैं। हम अपनी कैलकुलेशन को रियलिस्टिक रखने के लिए तीन अलग-अलग रिटर्न दरों (12%, 15% और 18%) के आधार पर मैच्योरिटी फंड को समझेंगे ताकि आपको एक साफ तस्वीर मिल सके।

10 साल का कैलकुलेशन

मान लेते हैं कि आपने जिस म्यूचुअल फंड योजना में निवेश किया है, वह आपको 10 सालों तक औसतन 12% का सालाना रिटर्न देती है। इस स्थिति में, आपके द्वारा जमा किए गए 12 लाख रुपये पर आपको लगभग 11.23 लाख रुपये का सिर्फ अनुमानित रिटर्न (मुनाफा) मिलेगा। यानी 10 साल पूरे होने पर आपकी कुल वेल्थ बढ़कर करीब 23.23 लाख रुपये हो जाएगी। वहीं, अगर आपका फंड थोड़ा बेहतर प्रदर्शन करता है और आपको 15% का सालाना रिटर्न मिल जाता है, तो कंपाउंडिंग (ब्याज पर ब्याज) का जादू और तेजी से काम करेगा। 15% रिटर्न के हिसाब से 12 लाख के निवेश पर आपको करीब 15.86 लाख रुपये का मुनाफा होगा, जिससे आपका फाइनल मैच्योरिटी अमाउंट बढ़कर लगभग 27.86 लाख रुपये हो जाएगा।

अगर किस्मत अच्छी रही और आपने किसी बेहतरीन स्मॉल कैप या मिड कैप फंड में निवेश किया है जिसने लंबी अवधि में 18% का बंपर सालाना रिटर्न दे दिया, तो आपकी किस्मत बदल सकती है। 18% रिटर्न की दर से आपकी 12 लाख रुपये की कुल निवेशित पूंजी पर आपको लगभग 21.62 लाख रुपये का शानदार रिटर्न मिलेगा। इसका मतलब है कि 10 साल बाद आपके हाथ में कुल मिलाकर करीब 33.62 लाख रुपये का एक बड़ा फंड होगा। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि जैसे-जैसे रिटर्न की दर 3-3% बढ़ी, आपके फाइनल अमाउंट में लाखों रुपये का अंतर आ गया। यही म्यूचुअल फंड में मिलने वाले कंपाउंडिंग की असली ताकत है, जो समय के साथ आपके पैसे को तेजी से बढ़ाती है।

अगर समझदारी से ले फैसला तो कितने अमीर हो जायेंगे?

लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा स्मार्ट कदम उठाकर आप इस 10 साल के फंड को और भी ज्यादा बड़ा बना सकते हैं? इस तरीके को फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स 'स्टेप-अप एसआईपी' (Step-Up SIP) कहते हैं। जैसे-जैसे समय बीतता है, नौकरीपेशा लोगों की सैलरी बढ़ती है और व्यापारियों की कमाई में इजाफा होता है। ऐसे में अगर आप हर साल अपनी 10,000 रुपये की एसआईपी में सिर्फ 10% की बढ़ोतरी (यानी अगले साल से ₹11,000, उसके अगले साल ₹12,100) करते जाते हैं, तो 10 साल बाद आपका कुल कॉर्पस सामान्य एसआईपी की तुलना में बहुत अधिक होगा। स्टेप-अप करने से आपका निवेश अनुशासन बना रहता है और महंगाई का आपके भविष्य के फंड पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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