कैसे फीचर से कंपटीटर बन गया एंथ्रोपिक का Claude AI, भारतीय IT इंडस्ट्री के लिए क्यों बढ़ीं मुश्किलें?
इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में फिलहाल भूचाल आया हुआ है। भूचाल की वजह एंथ्रोपिक का एक AI टूल है। खासतौर पर इसकी वजह से भारत की उन कंपनियों की मुश्किल बढ़ गई है, जो सॉफ्टवेयर को सर्विस की तरह बेचती हैं। इनमें TCS और इन्फोसिस जैसे दिग्गज भी शामिल हैं।
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Feb 5, 2026, 02:59 PM IST
ग्लोबल IT इंडस्ट्री में तहलका मचा हुआ है। खासतौर पर SAAS यानी सॉफ्टवेयर एज एक सर्विस के तौर पर कारोबार करने वाली कंपनियां, अस्तित्व के संकट जैसी स्थिति का सामना कर रही हैं। इस अफरा-तफरी की वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नया रूप है। इसे AGI या एजेंटिक AI कहा जा रहा है। इसकी वजह से खासतौर पर भारत की TCS और इन्फोसिस जैसी बड़ी कंपनियों के लिए भी चुनौतियां खड़ी होती दिख रही हैं। क्योंकि, Anthropic के Claude Cowork और उसके नए प्लगइन्स ने कई ऐसे काम ऑटोमेट कर दिए हैं, जो अब तक लाखों इंजीनियर और IT प्रोफेशनल करते रहे हैं। नतीजा यह कि IT शेयरों में बड़ी बिकवाली देखी गई और इंडस्ट्री के भविष्य को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है।
Claude Cowork ने क्यों मचाई हलचल?
Anthropic ने Claude Cowork लॉन्च किया है। इसे एक ऐसे डिजिटल सहकर्मी के रूप में डिजाइन किया गया है, जो डेटा एनालिसिस, कोडिंग, प्रोसेस ऑटोमेशन, रिपोर्टिंग और बैक-ऑफिस जैसे कई काम खुद कर सकता है। इसे एक AI चैटबॉट या AI असिस्टेंट के रूप में नहीं, बल्कि “डिजिटल वर्कर” के रूप में पेश किया गया है। यह टूल कंपनियों के मौजूदा सॉफ्टवेयर, डेटाबेस और वर्कफ्लो से सीधे जुड़कर कई काम खुद करने की क्षमता रखता है।
- अब तक कंपनियां डेटा एनालिसिस के लिए अलग एनालिस्ट टीम और टूल्स पर निर्भर रहती थीं।
- कोडिंग और सॉफ्टवेयर सपोर्ट के लिए बड़ी डेवलपर टीम की जरूरत होती थी।
- बिजनेस रिपोर्ट और डैशबोर्ड मैन्युअली तैयार किए जाते थे।
- कस्टमर सपोर्ट के लिए कॉल सेंटर और सपोर्ट स्टाफ काम करता था।
- फाइनेंस और पेरोल प्रोसेसिंग अलग सॉफ्टवेयर और टीम संभालती थी।
- HR और बैक-ऑफिस ऑपरेशन के लिए अलग टीम और सिस्टम लगते थे।
हलचल की असली वजह क्या?
हलचल की असली वजह इसके प्लगइन सिस्टम हैं। इन प्लगइन्स की मदद से Claude Cowork कंपनी के ईमेल, CRM, कोड रिपॉजिटरी, अकाउंटिंग सिस्टम और क्लाउड प्लेटफॉर्म से जुड़कर खुद डेटा पढ़ सकता है, विश्लेषण कर सकता है और कार्रवाई भी कर सकता है। यानी यह सिर्फ सुझाव नहीं देता, बल्कि काम भी कर सकता है। मिसाल के तौर पर अगर किसी कंपनी को हजारों कर्मचारियों का पेरोल तैयार करना हो, डेटा रिपोर्ट बनानी हो या कस्टमर क्वेरी सुलझानी हो, तो पहले बड़ी टीम लगती थी। अब AI यह काम मिनटों में कर सकता है।
| कंपनी | मुख्य बिजनेस फोकस | AI से संभावित असर | जोखिम या मौका? |
|---|---|---|---|
| TCS | बड़े एंटरप्राइज IT प्रोजेक्ट और सपोर्ट | ऑटोमेशन से पारंपरिक सपोर्ट प्रोजेक्ट घट सकते हैं | मध्यम जोखिम, AI में शिफ्ट से मौका |
| Infosys | एप्लिकेशन डेवलपमेंट और मेंटेनेंस | AI कोडिंग टूल्स से प्रोजेक्ट साइज घट सकता है | मध्यम जोखिम |
| HCLTech | इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सर्विस | इंफ्रा मैनेजमेंट में ऑटोमेशन का असर | मध्यम जोखिम |
| Wipro | IT सर्विस और BPO | बैक-ऑफिस और सपोर्ट सर्विस पर सीधा दबाव | ज्यादा जोखिम |
| Tech Mahindra | टेलीकॉम और एंटरप्राइज सर्विस | टेलीकॉम ऑटोमेशन से असर संभव | मध्यम जोखिम |
| LTIMindtree | डिजिटल और क्लाउड ट्रांसफॉर्मेशन | AI इंटीग्रेशन सर्विस में फायदा संभव | मौका ज्यादा |
| Persistent Systems | AI, क्लाउड और डिजिटल इंजीनियरिंग | AI अपनाने वाली कंपनियों को सर्विस देने का फायदा | बड़ा मौका |
| Coforge | डिजिटल और वर्टिकल स्पेशलाइजेशन | डोमेन-आधारित सॉल्यूशन की मांग बढ़ सकती है | मौका |
भारतीय कंपनियों की मुश्किल क्यों बढ़ी?
भारतीय IT इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा ऐसे बैकएंड और मैनेज्ड सर्विस कामों पर टिका है, जिन्हें Claude Cowork आसानी से निपटा सकता है। भारतीय कंपनियां इन कामों को पूरा करने के लिए लाखों रुपये खर्च करके सैकड़ों आईटी प्रॉफेशनल्स को हायर करती हैं। वहीं, Claude Cowork इस तरह के काम सिर्फ कुछ प्लइन्स की मदद से कर सकता है। इसलिए बाजार में यह धारणा बनी कि AI अब सिर्फ मददगार टूल नहीं रहा, बल्कि सीधे IT सर्विस कंपनियों का प्रतियोगी बन सकता है और इसी वजह से शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। भारतीय IT कंपनियों का बड़ा बिजनेस मॉडल बड़े वर्कफोर्स के जरिये क्लाइंट्स के लिए सेवाएं देने पर आधारित रहा है। अगर कंपनियां सीधे AI टूल अपनाने लगें तो मैनपावर आधारित यह मॉडल दबाव में आ सकता है। इसी वजह से इंडस्ट्री में नौकरी कटौती और स्किल बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक TCS समेत कई कंपनियां हायरिंग को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं।
फीचर से कंपटीटर कैसे बन गया AI?
अब तक AI को IT कंपनियां अपनी उत्पादकता बढ़ाने वाले टूल के रूप में इस्तेमाल कर रही थीं। लेकिन Claude Cowork जैसे सिस्टम अब खुद कई सॉफ्टवेयर और सर्विसेज की जगह लेने की क्षमता दिखा रहे हैं। प्लगइन्स के जरिये यह टूल डेटा प्रोसेसिंग, पेरोल, कस्टमर सपोर्ट, रिपोर्टिंग और कोड मैनेजमेंट जैसे काम खुद संभाल सकता है। यानी जहां पहले कई टीमें और अलग-अलग सॉफ्टवेयर लगते थे, वहां अब एक AI टूल काम कर सकता है।
शेयर बाजार में दिखा सीधा असर
4 फरवरी को Nifty IT इंडेक्स करीब 6.9% गिर गया, जो लगभग छह साल की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक रही। इस बिकवाली में TCS और Infosys जैसी बड़ी कंपनियों के मार्केट कैप से करीब ₹2 लाख करोड़ तक की वैल्यू साफ हो गई। निवेशकों को डर है कि अगर AI टूल सीधे काम करने लगेंगे तो IT सर्विस कंपनियों का पारंपरिक बिजनेस मॉडल कमजोर पड़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय IT कंपनियों को अब कम लागत वाली सेवाओं से हटकर हाई-वैल्यू कंसल्टिंग, डोमेन-स्पेसिफिक सॉल्यूशंस और AI इंटीग्रेशन सर्विसेज पर ध्यान देना होगा। जो कंपनियां AI को खतरे के बजाय अवसर के रूप में अपनाएंगी, वे आगे बढ़ सकती हैं, जबकि पारंपरिक मॉडल पर टिके रहना मुश्किल हो सकता है। Claude Cowork का लॉन्च भारतीय IT सेक्टर के लिए एक चेतावनी जैसा है। आने वाले समय में मुकाबला कंपनियों के बीच नहीं बल्कि इंसान और मशीन की क्षमता के बीच होगा। जो कंपनियां तेजी से खुद को बदल लेंगी, वही इस नए दौर में टिक पाएंगी।
