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होम लोन के छिपे हुए चार्जेस बढ़ा देंगे लाखों का खर्चा, भूलकर भी न करें ये काम

अगर आप नया घर लेने की योजना बना रहे हैं या अपने होम लोन को किसी दूसरे बैंक में शिफ्ट करने के बारे में सोच रहे हैं तो केवल ब्याज दरों पर ध्यान देना काफी नहीं है। आपके लोन एग्रीमेंट में कई ऐसे छिपे हुए शुल्क और फीस हो सकते हैं, जो आपकी कुल लागत को लाखों रुपए तक बढ़ा सकते हैं।

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Hidden home loan charges (Photo : iStock)

अगर आप नए साल की शुरुआत के साथ अपना घर खरीदने का विचार बना रहे हैं या होम लोन को एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर करना चाह रहे हैं तो ये जानकारी आपके लिए बेहद काम की साबित होने वाली है। केवल ब्याज दरों पर ध्यान देना काफी नहीं है बल्कि लोन एग्रीमेंट के उन छिपे हुए चार्जेस पर भी ध्यान देना होगा, जो आपका लाखों तक का खर्च बढ़ा सकते हैं।

लोन की शुरुआत

होम लोन की बात आती है तो सबसे पहले प्रोसेसिंग फीस, लीगल और प्रशासनिक फीस से इसकी शुरुआत होती है। इन चार्जेस को लोन आवेदन के समय देना होता है। प्रोसेसिंग फीस लोन राशि का 0.25 प्रतिशत से 1 प्रतिशत होती है। इसमें डॉक्यूमेंट्स की जांच, क्रेडिट चेक और कई दूसरे प्रशासनिक कार्य शामिल होते हैं।

प्रीपेमेंट चार्ज

इसी तरह, आपको जानकारी होनी चाहिए कि लोन की अवधि से पहले पूरा या आंशिक भुगतान अतिरिक्त शुल्क के साथ लागू हो सकता है। आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, फ्लोटिंग रेट होम लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लिया जा सकता। हालांकि, फिक्स्ड‑इंटरेस्ट‑रेट और हाइब्रिड‑इंटरेस्ट‑रेट होम लोन पर आमतौर पर पेनल्टी लागू हो सकती है।

फ्लोटिंग और फिक्स्ड रेट में स्विच करना

लोन की अवधि के दौरान फ्लोटिंग से फिक्स्ड रेट या फिक्स्ड रेट से फ्लोटिंग स्विच करने की स्थिति में कन्वर्शन चार्जेस का भुगतान करना पड़ सकता है। इस सुविधा के लिए बैंक अक्सर लोन के बाकी बचे हिस्से का 0.25% से 0.5% तक चार्ज ले लेते हैं।

बैलेंस ट्रांसफर चार्ज

होम लोन की अवधि के दौरान ऐसी भी स्थिति आ सकती है जब आप किसी दूसरे लेंडर से कम ब्याज दर पर बैलेंस ट्रांसफर का ऑफर पाएं। ऐसा करना तभी फायदेमंद हो सकता है जब दूसरे बैंक से बेहतर शर्तों पर लोन ट्रांसफर की सुविधा मिल रही हो। क्योंकि नए बैंक भी प्रोसेसिंग और वैल्यूएशन फीस ले सकते हैं, जिससे ट्रांसफर का लाभ कम हो सकता है।

समय पर ईएमआई

आपको यह भी समझने की जरूरत है कि आपकी सैलरी देर से आने या किसी मेडिकल इमरजेंसी के कारण अगर आप ईएमआई समय पर नहीं भर पाते हैं तो बैंक हर देरी पर भारी पेनल्टी चार्ज कर सकता है। यह पेनल्टी कुछ स्थितियों में 3 प्रतिशत तक भी बढ़ सकती है। वहीं, चेक बाउंस होने की स्थिति में भी शुल्क लग सकता है।
Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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