Gold Price Forecast: पिछले कुछ समय से सोने की कीमतों में आई लगातार गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। लोग यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि इस समय सोना खरीदें, थोड़ा इंतजार करें या फिर अपने पास मौजूद सोना बेच दें। पिछले छह महीनों में सोने के भाव में करीबी 13.6% और इस साल 2026 में अब तक करीब 5% की गिरावट आ चुकी है। बुलियंस डॉट इन के आंकड़ों के मुताबिक 11 अक्टूबर को सोना 151,710 रुपये प्रति 10 ग्राम है जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार करीब 4,220.30 डॉलर प्रति औंस के आसपास दर्ज किया गया। 29 जनवरी को सोना अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 5,595 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था, जिससे अब तक अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 26% की बड़ी गिरावट आ चुकी है। इसी तरह, भारतीय बाजार में भी कीमतें करीब 23% तक नीचे आई हैं।
सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आ रही है?
सोने के दाम गिरने के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना है। वर्तमान में अमेरिका का 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर करीब 5.27% पर पहुंच गया है। चूंकि सोने पर किसी तरह का ब्याज नहीं मिलता, इसलिए निवेशकों के लिए अधिक रिटर्न देने वाले बॉन्ड ज्यादा आकर्षक बन गए हैं। इसके चलते सोने की मांग में कमी आई है। इसके अलावा, ईरान संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने और बाजार में बनी अनिश्चितता ने भी सोने पर दबाव बनाया है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और क्यों अब भी उम्मीद बाकी है?
कीमतों में आई इस सुस्ती के बावजूद कई बड़े वित्तीय एक्सपर्ट्स और संस्थान सोने को लेकर सकारात्मक नजरिया बनाए हुए हैं। मिरे एसेट म्यूचुअल फंड के अनुसार, दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीदारी से बाजार को सपोर्ट मिल रहा है। अनुमान है कि 2026 में केंद्रीय बैंकों की कुल सोने की मांग करीब 700 टन रह सकती है, जो 2010 से 2021 के बीच के औसत 4,700 टन से काफी अधिक है। केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने का रुख कर रहे हैं।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों के बंद होने और बढ़ते सरकारी कर्ज से जुड़े जोखिम भी सोने में निवेशकों की रुचि बनाए हुए हैं। भारत में त्योहारी और शादी-ब्याह के सीजन के दौरान सोने की मांग में तेजी आने की उम्मीद है। नवरात्रि, दशहरा, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर घरेलू बाजार में खरीदारी बढ़ने से कीमतों को सहारा मिल सकता है।
सोने की कीमतों का आगे का अनुमान
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य में जेपी मॉर्गन ने अनुमान जताया है कि 2026 की आखिरी तिमाही के दौरान सोने की औसत कीमत 6,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास रह सकती है और 2027 के अंत तक यह 6,300 डॉलर तक पहुंच सकती है। हालांकि, फरवरी 2026 के अपने पुराने अनुमानों की तुलना में बैंक ने अपने लक्ष्यों को थोड़ा घटाया है। बैंक के विश्लेषक ग्रेग शीरर के मुताबिक, ऊर्जा से जुड़ी महंगाई और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चिंताओं के कारण फिलहाल ज्यादातर निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं।
क्या सोना और नीचे आ सकता है?
बाजार के जानकारों का मानना है कि अल्पकाल में सोने में कुछ और कमजोरी देखने को मिल सकती है, हालांकि लॉन्गटर्म मांग कीमतों को मजबूती देगी। ईरान संघर्ष के समाधान और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने से बॉन्ड यील्ड और महंगाई की स्थिति साफ होगी, जो सोने की अगली चाल तय करेगी। फिलहाल, यह कहना मुश्किल है कि सोने की कीमतें में आगे और भारी गिरावट आएगी या नहीं, इसलिए निवेशकों को बाजार की स्थिति पर बारीकी से नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
