इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में भारत सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 118 इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को मंजूरी देने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इन मंजूरियों के बाद देश में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट बनाने वाली यूनिट्स की संख्या बढ़कर 118 हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि 'इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (ECMS) के तहत मंजूर की गई इकाइयों में से 50 प्रतिशत इकाइयां छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) या सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) से जुड़ी हैं। लॉन्च कार्यक्रम में बोलते हुए, वैष्णव ने कहा कि सरकार सेमीकंडक्टर प्रोग्राम के दूसरे, तीसरे और चौथे स्तंभ (pillars) के तहत आवेदन स्वीकार करना शुरू करेगी। इससे भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करने की क्षमता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ी ताकत
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के तहत देश इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। भारत अब केवल इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मॉड्यूल और कंपोनेंट्स के साथ-साथ इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और मशीनों का उत्पादन भी घरेलू स्तर पर कर रहा है।
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में फिलहाल करीब 25 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। घरेलू स्तर पर कंपोनेंट्स और मटीरियल का उत्पादन बढ़ने से इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
बैटरी से PCB तक देश में बन रहे
भारत की मोबाइल फोन निर्माण यात्रा के शुरुआती दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब हमने मोबाइल फोन निर्माण की शुरुआत की थी, तो लोग हम पर हंसते थे। लोगों को लगता था कि हम केवल असेंबलिंग या 'स्क्रूड्राइवर टेक्नोलॉजी' (सिर्फ पुर्जों को जोड़ने का काम) तक ही सीमित हैं। सरकार की रणनीति के बारे में बताते हुए, वैष्णव ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल तैयार उत्पादों की असेंबलिंग पर निर्भर रहने के बजाय, मैन्युफैक्चरिंग के उच्च स्तर की ओर व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ना है।
मंत्री ने महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और सामग्रियों के निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमताओं का भी जिक्र किया। इनमें बैटरी सेल, कॉपर फॉयल और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCBs) में इस्तेमाल होने वाले कॉपर-क्लैड लैमिनेट्स शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज हम पूरी बैटरी सेल बना रहे हैं। हम कॉपर फॉयल बना रहे हैं। हम PCBs के लिए कॉपर-क्लैड लैमिनेट्स बना रहे हैं। एक तरह से, हम हर प्रोग्राम और हर मंजूरी के जरिए पूरी वैल्यू चेन में गहराई तक जा रहे हैं।"
वैष्णव के मुताबिक, भारत में अब कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और मटीरियल का निर्माण किया जा रहा है। इनमें एनोड मटीरियल, कैथोड मटीरियल, कॉपर फॉइल, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), फ्लेक्सिबल PCB और 20-लेयर PCB शामिल हैं। इसके अलावा ऑप्टिकल ट्रांसीवर, रिले और कैपेसिटर जैसे उत्पाद भी देश में बनाए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों का घरेलू उत्पादन भारत के लिए दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण है। इससे देश में एक मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित होगा।
उन्होंने भरोसा जताया कि यह पहल आने वाले कई दशकों तक देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूती देगी। साथ ही, युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसरों की नींव तैयार करेगी।
क्या है ECMS?
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) का उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और उनसे जुड़े उत्पादों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना है। इसके जरिए सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करना, आयात पर निर्भरता घटाना और देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करना चाहती है। सरकार ने शुक्रवार को महत्वाकांक्षी सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत 'सेमीकॉन 2.0’ वेब एप्लिकेशन मंच भी शुरू किया।
7,500 करोड़ से अधिक के निवेश को मंजूरी
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) के तहत 7,500 करोड़ रुपये से अधिक के 12 नए आवेदनों को मंजूरी दी है। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को बताया कि नए आवेदनों में सामग्री एवं पूंजीगत वस्तुओं से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न क्षेत्रों में योजना का दायरा बढ़ेगा। इन मंजूरियों से इस योजना को और गति मिलेगी। इसका उद्देश्य देश में कलपुर्जों का घरेलू तंत्र विकसित करना और आयात पर भारत की निर्भरता कम करना है। सरकार कलपुर्जा उत्पादन के साथ-साथ कच्चे माल और विनिर्माण उपकरणों जैसे शुरुआती क्षेत्रों को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है।
