दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क (Elon Musk) एक बार फिर पूरी दुनिया की सुर्खियों में छाए हुए हैं। इस बार वजह है उनकी रॉकेट कंपनी 'स्पेसएक्स' (SpaceX), जो दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ। स्पेस टेक कंपनी SpaceX के IPO की 12 जून को अमेरिकी बाजार में शानदार लिस्टिंग हुई। 135 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर कंपनी का कुल वैल्यूएशन करीब 1.7 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है। कंपनी में मस्क की लगभग 42 फीसदी हिस्सेदारी है, जिससे इस लिस्टिंग के साथ ही उनकी नेटवर्थ में करीब 866 बिलियन डॉलर का तगड़ा इजाफा हुआ। इसके अलावा, टेस्ला और न्यूरालिंक जैसी दिग्गज कंपनियों में भी मस्क की बड़ी होल्डिंग है। इन सभी को मिलाकर अब उनकी कुल नेटवर्थ 1.1 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गई है, जिससे वे दुनिया के पहले 'ट्रिलियनेयर' बन गए हैं।
लेकिन मस्क का यह सफर इतना आसान नहीं था। उन्हें इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचने में एक लंबा वक्त लगा है। इस दौरान उन्होंने कई अलग-अलग बिजनेस शुरू किए, जिनमें से कुछ में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा तो कुछ में उन्होंने सफलता के नए झंडे गाड़े। तो आइए बेहद करीब से जानते हैं मस्क के इस उतार-चढ़ाव भरे और प्रेरणादायक सफर की पूरी कहानी।
प्रिटोरिया से शुरू हुआ एलन मस्क का सफर
28 जून 1971 को दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में जन्मे एलन मस्क के लिए कामयाबी का यह मुकाम रातों-रात नहीं मिला है। उनके जीवन का सफर बेहद कठिन और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। मस्क बचपन से ही नई चीजें सीखने और बनाने के शौकीन थे। उन्होंने महज 10 साल की उम्र में अपना पहला कंप्यूटर खरीदा और कोडिंग सीखनी शुरू कर दी। इसके बाद सिर्फ 12 साल की उम्र (साल 1983) में उन्होंने 'Blastar' नाम का एक वीडियो गेम सॉफ्टवेयर बना डाला। इस गेम के सोर्स कोड को उन्होंने एक मैगजीन को 500 डॉलर में बेच दिया था। यह मस्क की जिंदगी की पहली कमाई थी और यहीं से उनके भीतर का बिजनेसमैन जाग उठा था।
बॉयलर रूम क्लीनर की नौकरी और पढ़ाई
जब मस्क 17 साल के हुए, तो वे दक्षिण अफ्रीका छोड़कर कनाडा आ गए। यहां उनके जीवन का सबसे संघर्षपूर्ण दौर शुरू हुआ। साल 1989 में उन्होंने एक लंबर मिल (लकड़ी काटने वाली मिल) में बॉयलर रूम क्लीनर के रूप में अपनी पहली नौकरी की। इस काम के लिए उन्हें हर घंटे 18 डॉलर मिलते थे। यह नौकरी न सिर्फ थका देने वाली थी, बल्कि बेहद खतरनाक भी थी। वहां का तापमान इतना ज्यादा होता था कि हाइपरथर्मिया (शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाना) से बचने के लिए मस्क को हर 15 मिनट में दूसरे कर्मचारियों के साथ अपनी पोजीशन बदलनी पड़ती थी। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई करने के लिए अमेरिका आ गए, जहां उन्होंने फिजिक्स और इकोनॉमिक्स की डिग्री ली।
कंपनियों का साम्राज्य और कंगाली का वो दौर
मस्क को काम करने का ऐसा जुनून है कि उन्होंने अपने करियर में अब तक करीब 50 से ज्यादा बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाए हैं। साल 1999 में उन्होंने ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम X.com बनाया, जो बाद में पेपाल (PayPal) बना। साल 2002 में ईबे (eBay) ने पेपाल को 1.5 अरब डॉलर में खरीद लिया। इस पैसे से मस्क ने जून 2002 में स्पेसएक्स की स्थापना की और 2003 में इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला (Tesla) की शुरुआत की।
लेकिन साल 2008 तक आते-आते (जब मस्क करीब 37 साल के थे) उनकी दोनों कंपनियां बुरी तरह घाटे में चल रही थीं। उनके शुरुआती तीन रॉकेट लॉन्च पूरी तरह फेल हो चुके थे और वे कंगाल होने की कगार पर पहुंच गए थे। मस्क के पास अपनी पत्नी से तलाक और बिजनेस संभालने के लिए पैसे नहीं बचे थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपना आखिरी दांव खेला। साल 2008 के अंत में स्पेसएक्स का चौथा रॉकेट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंच गया और यह कारनामा करने वाली वह दुनिया की पहली प्राइवेट कंपनी बनी।
बदल दिया सोशल मीडिया का चेहरा
एलन मस्क आज सिर्फ रॉकेट और कारें ही नहीं बना रहे, बल्कि उन्होंने सोशल मीडिया का चेहरा भी बदल दिया है। अक्टूबर 2022 में मस्क ने 44 अरब डॉलर में मशहूर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को खरीदा और उसका नाम बदलकर 'X' कर दिया। इसके अलावा, उनकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी 'xAI' और टेस्ला की कंबाइंड वैल्यू आज 1 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक है। मस्क की एक और क्रांतिकारी कंपनी 'न्यूरालिंक' (Neuralink) ने साल 2024 में पहली बार एक इंसान के दिमाग में कंप्यूटर चिप का सफल इम्प्लांट करके मेडिकल जगत में इतिहास रच दिया।
आज एलन मस्क का इकलौता और सबसे बड़ा सपना इंसानी बस्तियों को मंगल ग्रह (Mars) पर बसाना है। जिस लड़के ने कभी बॉयलर रूम की कालिख साफ करने से शुरुआत की थी, आज वह ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने और इंसानी भविष्य को बदलने की कगार पर खड़ा है।
