Crude Oil Price to Hit $200 : विटोल (Vitol) के CEO रसेल हार्डी का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया से मौजूदा तेल सप्लाई और बाधित हो जाती है, तो कच्चे तेल का दाम 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। पश्चिमी देशों के तेल भंडार में उपलब्ध गुंजाइश कम होने और होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के आसपास टैंकरों पर बढ़ते हमलों ने चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड $104.28 प्रति बैरल पर बंद हुआ था, जो एक दिन में 4.1% की तेजी है।
$200 क्रूड की आशंका क्यों बढ़ी?
दुनिया की सबसे बड़ी स्वतंत्र तेल ट्रेडिंग कंपनियों में शामिल विटोल ग्रुप के CEO रसेल हार्डी ने लंदन में एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम में तेल बाजार के जोखिमों पर बात की। उन्होंने कहा कि अगर खाड़ी क्षेत्र से तेल की सप्लाई जारी रखने वाले मौजूदा इंतजाम बाधित होते हैं, तो कच्चे तेल की कीमत $200 प्रति बैरल तक पहुंचने का परिदृश्य बन सकता है। हार्डी के मुताबिक, पश्चिमी देशों में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध तेल भंडार को लेकर भी अब ज्यादा गुंजाइश नहीं बची है। ऐसे में मिडिल ईस्ट से लगातार तेल की सप्लाई होना बेहद जरूरी है। हालांकि, उनका बयान $200 के संभावित जोखिम को लेकर है, न कि यह पक्का अनुमान कि तेल की कीमत इतनी हो ही जाएगी।
अभी कैसे चल रहा होर्मुज में तल व्यापार?
मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई बनाए रखने में Ship-to-Ship (STS) ट्रांसफर की अहम भूमिका है। इस व्यवस्था में छोटे टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल लेकर निकलते हैं और ओमान की खाड़ी में बड़े टैंकरों पर तेल का कार्गो ट्रांसफर किया जाता है। इससे खाड़ी क्षेत्र के तेल निर्यातकों को मुश्किल समुद्री हालात के बीच भी सप्लाई जारी रखने में मदद मिलती है। हार्डी के मुताबिक, हाल के 7-10 दिनों में मिडिल ईस्ट से प्रतिदिन करीब 14 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बाहर भेजे गए। इसमें लगभग 12 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 2 मिलियन बैरल रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे। यह मात्रा बाजार पर कीमतों का दबाव कम रखने के लिए अहम है।
क्यों बढ़ता जा रहा खतरा?
तेल बाजार की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जहाजों की सुरक्षा को लेकर है। इस रास्ते से गुजरने वाले टैंकरों पर हमलों और धमकियों से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। रॉयटर्स की 8 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से केवल 7 कमोडिटी जहाज गुजरे। यह 23 जुलाई के बाद सबसे कम संख्या थी। इसी दौरान इस रास्ते से कच्चे तेल का प्रवाह हाल के युद्धकालीन उच्च स्तर से 27% घटकर कम से कम 10.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया था। यह युद्ध से पहले के स्तर का लगभग 74% था।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या होगा असर?
तेल की सप्लाई में लंबी रुकावट आने पर कच्चे तेल के साथ-साथ डीजल, जेट फ्यूल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। हार्डी ने कहा कि रिफाइनिंग क्षमता पर पहले से दबाव है। रूस के ऊर्जा ढांचे को नुकसान और मिडिल ईस्ट में कई महीनों तक रिफाइनिंग गतिविधियां प्रभावित रहने से रिफाइंड उत्पादों की उपलब्धता भी चुनौती बनी हुई है। उनका अनुमान है कि इन बाजारों में किल्लत का असर सर्दियों तक बना रह सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत पहले ही ब्रेंट से ऊपर क्रूड खरीद रहा है। अगर ब्रेंड और WTI क्रूड का भाव 200 डॉलर प्रति बैरल पहुंचता है, तो इंडियन क्रूड बास्केट में इसका भाव मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए 225 से 250 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका है। अगर ऐसा होता है, तो यह रुपये के साथ ही पूरी भारतीय इकोनॉमी को झकझोरने वाला होगा। चूंकि, भारत में डीजल-पेट्रोल की कीमतें पूरी तरह ओपन मार्केट के हिसाब से नहीं चलती हैंं। लेकिन, इस स्थिति में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के सामने दाम बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक अगर क्रूड 200 जाता है, तो भारत में पेट्रोल के दाम 165 और डीजल 155 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता है।
