सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी Coal India Limited (सीआईएल) देश में कोयले के आयात को कम करने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है है। आसान भाषा में समझें तो कंपनी चाहती है कि भारत को बाहर से कम से कम कोयला मंगवाना पड़े और अपनी जरूरतें ज्यादातर घरेलू उत्पादन से ही पूरी हो जाएं। इसके लिए सीआईएल ने अगले 10 साल (2026–2036) का एक रोडमैप तैयार करने की योजना बनाई है, जिसमें करीब 24.3 करोड़ टन कोयला आयात कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर होगा जोर
पीटीआई (भाषा) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का मुख्य फोकस तीन चीजों पर घरेलू उत्पादन बढ़ाना, कोयले की गुणवत्ता सुधारना और उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की लागत (लॉजिस्टिक्स) को संतुलित करने पर होगा। वर्तमान में कई बार ऐसा होता है कि देश में कोयला उपलब्ध होने के बावजूद कंपनियां बाहर से आयात करती हैं, क्योंकि लॉजिस्टिक खर्च या गुणवत्ता की वजह से आयात सस्ता या आसान पड़ता है। अब सीआईएल इस स्थिति को बदलना चाहती है।
सुधार की जरूरतों पर रहेगा ध्यान
इसके तहत एक खास कदम “फोरेंसिक ऑडिट” होगा, जिसका मतलब है कि यह बारीकी से जांच की जाएगी कि आखिर किन-किन सेक्टर में और क्यों कोयले का आयात हो रहा है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कहां सुधार की जरूरत है। इसके बाद सेक्टर के हिसाब से अलग-अलग नीतियां बनाई जाएंगी, ताकि स्थानीय स्तर पर कोयले की सप्लाई बढ़ाई जा सके और आयात की जरूरत धीरे-धीरे खत्म हो।
कोयले की गुणवत्ता सुधारने पर फोकस
एक और महत्वपूर्ण पहल नेशनल वॉशरी एंड लॉजिस्टिक्स ग्रिड बनाने की भी है। इसका मतलब है कि कोयले की सफाई (वॉशिंग) और उसके परिवहन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जाएगा। इससे कोयले की गुणवत्ता सुधरेगी और सप्लाई में आने वाली रुकावटें कम होंगी।
देश की ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत
कोल इंडिया लिमिटेड घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान देती है। कंपनी इस ड्राफ्ट को तैयार करने और गैर-शुल्क बाधाओं से संबंधित उपायों का सुझाव देने के लिए एक सलाहकार की नियुक्ति करने की भी योजना बना रही है।
यह पूरी योजना इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, यानी भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर कम निर्भर रहेगा। साथ ही, इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और पर्यावरण से जुड़े लक्ष्यों, जैसे National Coal Gasification Mission को भी पूरा करने में मदद मिलेगी। यह योजना भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
