कच्चा तेल महंगा होने से भारतीय शेयर बाजर में आज बड़ी गिरावट है। सबसे अधिक बिकवाली IT शेयरों में देखने को मिल रही, जबकि इससे पिछले सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) निवेश को लेकर बनी सकारात्मक उम्मीदों के चलते अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी आई थी। IT इंडेक्स 1,087.80 अंक यानी 3.38 प्रतिशत गिरकर 31,101.65 पर ट्रेड कर रहा है।
यह गिरावट मंगलवार को अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेजी के बावजूद हुई। पिछले हफ्ते हुई बिकवाली के बाद चिप बनाने वाली कंपनियों में सुधार (rebound) देखने को मिला, जिससे नैस्डैक कंपोजिट (Nasdaq Composite) 1.18 प्रतिशत ऊपर चढ़ गया।
निवेशकों का 76 करोड़ से अधिक का नुकसान
10 भारतीय IT कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalisation) में लगभग 76,871 करोड़ रुपये की कमी आई। इंफोसिस (Infosys) का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिनमें क्रमशः 4.80 प्रतिशत और 4.50 प्रतिशत की गिरावट आई। टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) में 3.62 प्रतिशत और कोफोर्ज (Coforge) में 3.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इंफोसिस ने FY27 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस को 1.5-3 प्रतिशत की रेंज से घटाकर 1-2 प्रतिशत (कांस्टेंट करेंसी के आधार पर) कर दिया है, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन गाइडेंस को 20-22 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर 2.92 प्रतिशत गिरकर 2,424.10 रुपये पर आ गए, जबकि HCL टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies) के शेयरों में 2.77 प्रतिशत की गिरावट आई।
क्यों आई इनती बड़ी गिरावट?
भारतीय IT शेयरों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का दबाव है। AI आधारित ऑटोमेशन से निवेशकों को आशंका है कि कंपनियों के पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, टेस्टिंग और मेंटेनेंस जैसे कामों की मांग घट सकती है। भारतीय IT कंपनियों का कारोबार काफी हद तक कुशल कर्मचारियों के जरिए ग्राहकों को तकनीकी सेवाएं देने पर निर्भर है। अगर AI की मदद से ग्राहक कम कर्मचारियों में अधिक काम करने लगते हैं, तो पारंपरिक आउटसोर्सिंग सेवाओं से होने वाली कमाई प्रभावित हो सकती है।
वैश्विक मोर्चे पर मध्य पूर्व में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली और रुपये में कमजोरी ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। महंगे तेल से भारत में महंगाई और आयात बिल बढ़ने का जोखिम है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति भी निवेशकों के लिए अहम रहेगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, AI से कमाई बढ़ाने की क्षमता, नए सौदों और कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर IT सेक्टर की आगे की चाल निर्भर करेगी।
