Silver Jewellery Mandatory Hallmarking: सरकार स्वैच्छिक रूप से शुरू की गई चांदी के आभूषणों और वस्तुओं की हॉलमार्किंग की प्रक्रिया का मूल्यांकन करने के बाद इसे अनिवार्य करने पर विचार करेगी। जैसा कि सोने के आभूषणों के लिए है। इस संबंध में उपभोक्ताओं के हित में धातु की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक डिजिटल पहचान प्रणाली लागू की गई है। सरकार ने 1 सितंबर से प्रभावी चांदी के आभूषणों और वस्तुओं के लिए स्वैच्छिक हॉलमार्किंग की घोषणा 4 सितंबर को की थी।
छह महीने के भीतर मूल्यांकन के बाद फैसला
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के महानिदेशक प्रमोद कुमार तिवारी ने पीटीआई-भाषा से बताया कि इस पहल का क्या असर होता है मूल्यांकन करने के लिए छह महीने का समय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें इसका मूल्यांकन करने के लिए कुछ समय चाहिए। छह महीने पर्याप्त होंगे। हम 6 महीने तक इस पर गौर करेंगे और उसके बाद विचार करेंगे कि इसे अनिवार्य किया जाए या नहीं।
छोटी यूनिट के लिए बड़ी चुनौती
तिवारी ने बताया कि सोने के गहनों की तरह चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग को भी अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे स्तर पर लोग चांदी पिघलाकर आभूषण बनाते हैं और उन्हें अनिवार्य प्रमाणन के दायरे में लाना एक बड़ी चुनौती है।
बीआईएस की भूमिका
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है, जिसकी स्थापना बीआईएस एक्ट 2016 के तहत की गई है। इसका उद्देश्य वस्तुओं के मानकीकरण, अंकन और गुणवत्ता प्रमाणन को सुनिश्चित करना है।
ई-परिवहन के लिए भी मानक तय
एक अन्य सवाल के जवाब में तिवारी ने बताया कि ई-परिवहन क्षेत्र में भी बीआईएस ने कई मानक विकसित किए हैं। उन्होंने कहा कि हमने बैटरी चार्जिंग के लिए ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए मानक विकसित किए हैं। हम बैटरी अदला-बदली (Swapping) के लिए भी मानक बना रहे हैं, जो अभी मसौदा चरण में है। उन्होंने आगे जोड़ा कि अगर हमें ईवी को लोकप्रिय बनाना है, तो हमारे पास ईवी के लिए पेट्रोल पंप जैसा बुनियादी ढांचा होना चाहिए।
