दिवाली पर लोग अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों को तरह-तरह के गिफ्ट देते हैं। कोई सोने के गहने देता है, तो कोई नकद पैसे या प्रॉपर्टी। लेकिन महंगा गिफ्ट देने या पाने से पहले इनकम टैक्स के नियम समझना जरूरी है। इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 92(2)(m) के तहत कुछ गिफ्ट पाने वाले व्यक्ति की टैक्स योग्य आय में जोड़े जा सकते हैं। इसलिए सिर्फ त्योहार के मौके पर मिला गिफ्ट होने से वह टैक्स फ्री नहीं हो जाता।
50,000 रुपये से ज्यादा कैश मिलने पर क्या होगा?
अगर किसी व्यक्ति को एक वित्त वर्ष में बिना किसी भुगतान के मिले नकद गिफ्ट की कुल रकम 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो सामान्य नियम के तहत पूरी रकम टैक्स के दायरे में आ सकती है, केवल 50,000 रुपये से ऊपर की रकम नहीं। उदाहरण के लिए, अगर किसी गैर-रिश्तेदार से 60,000 रुपये का गिफ्ट मिलता है और कोई छूट लागू नहीं होती, तो पूरी रकम टैक्स योग्य हो सकती है। सोने के गहने, शेयर और पेंटिंग जैसी कुछ चल संपत्तियों पर भी 50,000 रुपये की सीमा से जुड़े नियम लागू होते हैं।
गिफ्ट में सोना या प्रॉपर्टी मिलने पर टैक्स
अगर किसी व्यक्ति को बिना पैसे दिए सोने के गहने या दूसरी तय चल संपत्ति मिलती है और उनकी कुल उचित बाजार कीमत 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो सामान्य नियम के तहत पूरी कीमत टैक्स योग्य हो सकती है। प्रॉपर्टी के मामले में अलग नियम हैं। अगर जमीन या मकान मुफ्त में मिलता है और उसकी स्टांप ड्यूटी वैल्यू 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो पूरी स्टांप ड्यूटी वैल्यू पर टैक्स लग सकता है। कम कीमत पर प्रॉपर्टी खरीदने पर भी स्टांप ड्यूटी वैल्यू और चुकाई गई रकम के अंतर के आधार पर टैक्स की स्थिति बन सकती है।
किन रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट पर छूट है?
माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बहन, बच्चों और कानून में बताए गए कुछ अन्य रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट पर सामान्य तौर पर 50,000 रुपये की सीमा वाला टैक्स नियम लागू नहीं होता। लेकिन दोस्तों या सहकर्मियों से मिले महंगे गिफ्ट पर टैक्स लग सकता है, अगर कोई दूसरी छूट लागू न हो। अपनी शादी के मौके पर मिले गिफ्ट और वसीयत या विरासत से मिली संपत्ति के लिए भी अलग छूट के प्रावधान हैं। ध्यान रहे, दिवाली पर मिला गिफ्ट सिर्फ त्योहार के कारण टैक्स फ्री नहीं हो जाता।
ऑफिस से मिले दिवाली गिफ्ट पर क्या नियम है?
कंपनी से मिलने वाले गिफ्ट पर भी टैक्स नियम लागू हो सकते हैं। इनकम टैक्स नियम, 2026 के मुताबिक, कर्मचारी को पूरे साल में मिले सामान, वाउचर या टोकन की कुल कीमत 15,000 रुपये से कम होने पर सामान्य तौर पर उसका कर योग्य मूल्य शून्य माना जाता है। इससे अधिक कीमत होने पर लागू नियमों के अनुसार टैक्स की जांच करनी चाहिए।
