भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) के शेयरों में सोमवार को अच्छी बढ़त देखने को मिली। सेंट्रल बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंड बैंक के शेयर 4% तक उछले। इसकी वजह वित्त मंत्रालय की वह नई योजना है, जिसमें कई बैंकों के बड़े पैमाने पर विलय (Merger) किए जाने की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि इस योजना की आधिकारिक घोषणा अप्रैल या मई 2024 में हो सकती है।
सरकार का बड़ा प्लान: 12 बैंक बनेंगे 6–7 बड़े बैंक
इंफॉर्मिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का लक्ष्य है कि मौजूदा 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मिलाकर केवल 6 से 7 बड़े बैंक बनाए जाएं। इससे बैंक ज्यादा मजबूत बनेंगे और निजी क्षेत्र के बैंकों के मुकाबले बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। शुरूआत में एक या दो छोटे बैंकों को SBI या PNB जैसे बड़े बैंकों में मिलाया जा सकता है।
सरकार इस कदम को इसलिए आगे बढ़ा रही है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में PSU बैंकों की वित्तीय स्थिति काफी सुधरी है। जहां पहले इन्हें लगातार सरकारी पूंजी की जरूरत पड़ती थी, वहीं अब ये खुद को संभालने में सक्षम हो गए हैं। FY17 से FY22 के बीच सरकार ने इन बैंकों को 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता दी थी।
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SBI के चेयरमैन सी.एस. सेटी ने भी नए विलय का समर्थन किया है। उनका कहना है कि कुछ छोटे बैंक अभी भी कमजोर स्थिति में हैं, इसलिए बड़े बैंकों के साथ उनका विलय किया जाना समझदारी भरा कदम होगा। उन्होंने कहा कि भारत की विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए बैंकिंग सेक्टर को और मजबूत बनने की जरूरत है।
इस खबर का सीधा असर शेयर बाजार में दिखा। PSU Bank Index में जबरदस्त तेजी देखी गई और सेंट्रल बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंड बैंक सबसे ज्यादा लाभ वाले शेयरों में शामिल रहे। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि PSU बैंकों में तेजी का रुझान आने वाले हफ्तों में भी जारी रह सकता है।
इससे पहले 2020 में भी केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 10 बैंकों को मिलाकर 4 बड़े बैंक बनाए थे, जिससे PSU बैंकों की संख्या 20 से घटकर 12 हो गई। अब एक बार फिर सरकार बैंकिंग सिस्टम को और मजबूत व प्रभावी बनाने के लिए नया समेकन (Consolidation) करने जा रही है।
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इसे और बड़े वित्तीय ढांचे की जरूरत होगी। ऐसे में छोटे बैंकों का बड़े संस्थानों में विलय करके उन्हें मजबूत बनाना जरूरी हो गया है, ताकि वे बड़े प्रोजेक्ट्स के फाइनेंसिंग में मदद कर सकें और देश की आर्थिक विकास गति को सपोर्ट कर सकें।