हाल ही में टाटा मोटर्स ने अपनी नई कार 2026 Tata Tiago EV को पेश किया है। यह कंपनी की अब तक की सबसे सस्ती कार है (टाटा नैनो को छोड़कर)। इसकी शुरुआती कीमत 4.69 रुपये है। ऐसे में एक सवाल लोगों को जेहन में आ रहा है कि क्या अब पेट्रोल छोड़कर इलेक्ट्रिक कार खरीदने का वक्त आ गया है, क्या अब EV खरीदने में ही समझदारी है? आइए विस्तार से समझते हैं...
कम हुई कीमतें, बढ़ा ग्राहकों का रुझान
कुछ साल पहले तक इलेक्ट्रिक कारें आम लोगों की पहुंच से बाहर मानी जाती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। कई कंपनियां एंट्री-लेवल EV को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर पेश कर रही हैं। सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने भी कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद की है। इसके चलते EV खरीदने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
रनिंग कॉस्ट में मिल सकती है बड़ी बचत
इलेक्ट्रिक कारों का सबसे बड़ा फायदा उनकी कम रनिंग कॉस्ट है। जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती रहती हैं, वहीं घर पर चार्ज की गई EV को चलाने का खर्च काफी कम पड़ सकता है। रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लोगों के लिए यह बचत समय के साथ काफी बड़ी हो सकती है।
मेंटेनेंस भी होता है कम
पेट्रोल कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक कारों में कम मूविंग पार्ट्स होते हैं। इसके कारण इंजन ऑयल बदलवाने, क्लच रिपेयर कराने या कई अन्य नियमित सर्विसिंग खर्चों की जरूरत नहीं पड़ती। इससे वाहन की मेंटेनेंस लागत भी कम हो जाती है।
लेकिन हर किसी के लिए नहीं है सही विकल्प
हालांकि इलेक्ट्रिक कारें कई फायदे देती हैं, लेकिन हर ग्राहक के लिए यह सबसे बेहतर विकल्प नहीं हो सकतीं। जिन लोगों को अक्सर लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती है या ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां चार्जिंग स्टेशन कम हैं, उन्हें अभी भी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। चार्जिंग में लगने वाला समय भी पेट्रोल भरवाने की तुलना में अधिक होता है।
खरीदने से पहले इन बातों पर करें विचार
EV खरीदने से पहले अपनी दैनिक ड्राइविंग जरूरत, चार्जिंग सुविधा, बजट और यात्रा पैटर्न का मूल्यांकन जरूर करें। यदि आपकी अधिकांश यात्रा शहर के भीतर होती है और घर या ऑफिस में चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है, तो इलेक्ट्रिक कार एक लाभदायक विकल्प बन सकती है।
