US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब सैन्य कार्रवाई से आगे बढ़कर आर्थिक मोर्चे पर भी तेज होता दिख रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका, ईरान पर “इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध” लगाने जा रहा है। उन्होंने चीन समेत दुनिया के देशों से ईरान को मिलने वाली आर्थिक मदद रोकने में अमेरिका का साथ देने की अपील की है।
बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका की रणनीति ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की है। उन्होंने इसे वन-टू पंच बताते हुए कहा कि एक तरफ ईरान पर नाकेबंदी है और दूसरी तरफ अब बेहद कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। उनके अनुसार इसका मकसद तेहरान पर इतना दबाव बनाना है कि आगे बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की जरूरत न पड़े।
चीन से अमेरिका ने क्या की अपील?
अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा नजर चीन पर है, क्योंकि चीन ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार है। बेसेंट ने चीन से अमेरिका के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है। बेसेंट ने चीन से अमेरिकी कार्यक्रम के साथ आने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों में सहयोग करने को कहा। उन्होंने कहा कि चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से पूरा करता है। इसलिए होर्मुज का खुला रहना चीन के अपने हित में भी है।
हालांकि, नए प्रतिबंधों में चीन या दूसरे देशों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई होगी, इसका पूरा ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। बेसेंट ने कहा है कि वह 24 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रतिबंधों की विस्तृत जानकारी देंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक दिन पहले ईरान के खिलाफ “आर्थिक युद्ध” की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि जो भी देश ईरान को किसी तरह की आर्थिक मदद या “लाइफलाइन” उपलब्ध कराएगा, उसे भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
प्रतिबंधों की खबर से बढ़े तेल के दाम
अमेरिका की इस घोषणा का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दिया। ईरान से जुड़े तनाव और आपूर्ति को लेकर चिंता के बीच गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतें तीन सप्ताह से ज्यादा के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड करीब 93.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, जबकि WTI करीब 88.01 डॉलर प्रति बैरल तक गया।
ईरान के साथ जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग बाधित होने से पहले ही वैश्विक तेल बाजार पर दबाव है। ऐसे में अगर अमेरिका के नए प्रतिबंध ईरान के तेल निर्यात और उसके व्यापारिक साझेदारों पर असर डालते हैं, तो बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ सकती है।
ईरान ने अमेरिका की धमकी को बताया ‘आर्थिक आतंकवाद’
अमेरिकी प्रतिबंधों की धमकी पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी आर्थिक दबाव को “आर्थिक आतंकवाद” बताया और कहा कि इस तरह की नीतियां पहले भी विफल रही हैं। तेहरान ने संकेत दिया है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा।
