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रूस के Mission Moon पर संकट के बादल! चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग से पहले लूना- 25 को करना पड़ा इमरजेंसी का सामना

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 20, 2023, 10:44 AM IST

Chandrayaan 3 and Luna 25: चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग से पहले की कक्षा में लूना-25 को स्थानांतरिक करने के लिए थ्रस्टर चलाया गया था। हालांकि, इसी दौरान कोई तकनीकी खराबी आई, जिसने इसके थ्रस्टर को ऑन करने की अनुमति नहीं दी। वैज्ञानिक फिलहाल इस समस्या का हल नहीं ढूंढ पाए हैं।

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रूस के चंद्र मिशन लूना-25 में आई तकनीकी समस्या

Photo : Twitter

Chandrayaan 3 and Luna 25: भारत का महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) और रूस का चंद्र मिशन लूना-25 (Luna-25) इन दिनों सुर्खियों में है। दोनों चंद्र मिशनों के बीच चांद पर उतरने की होड़ लगी हुई है। अभी तक खबर थी कि रूस का लूना-25, भारत के चंद्रयान-3 से पहले सॉफ्ट लैंडिंग कर सकता है। हालांकि, अब यह सॉफ्ट लैंडिंग सवालों के घेरे में है।

दरअसल, रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) ने बताया है कि लूना-25 को चंद्रमा की कक्षा में इमरजेंसी का सामना करना पड़ रहा है। ऑर्बिट बदलते वक्त उसमें तकनीकी खराबी आई है। वैज्ञानिकों की टीम फिलहाल तकनीकी खराबी को दूर नहीं कर पाई है और समस्या का लगातार विश्लेषण किया जा रहा है।

ऑर्बिट बदलते वक्त आई खराबी

रूसी स्पेस एजेंसी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग से पहले की कक्षा में लूना-25 को स्थानांतरिक करने के लिए थ्रस्टर चलाया गया था। हालांकि, इसी दौरान कोई तकनीकी खराबी आई, जिसने इसके थ्रस्टर को ऑन करने की अनुमति नहीं दी। बता दें, ऑर्बिट बदलने की योजना के तहत लूना-25 में एक ऑनबोर्ड कम्प्यूटर लगा हुआ है, जो ऑटोमैटिकली अपना रास्ता सेलेकट करता है। इसी ऑनबोर्ड कम्प्यूटर पर इमरजेंसी हुई।

चंद्रयान-3 से पहले होनी है लैंडिंग

रूस अपने चंद्र मिशन लूना-25 को चंद्रयान से पहले चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड कराने वाला है। तय तारीख के मुताबिक, उम्मीद जताई जा रही है कि लूना-25 21 या 22 अगस्त को चांद की सतह पर पहुंच जाएगा। वहीं चंद्रयान-3 आने वाले 23 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। यानी दोनों चंद्र मिशनों की सॉफ्ट लैंडिंग का समय लगभग एक हो सकता है। हालांकि, लूना-25 कुछ घंटे पहले चांद की सतर पर लैंडिंग करेगा। रोस्कोस्मोस ने बताया कि लूना- 25 ने चांद की सतर की तस्वीरें भेजी हैं। यह चंद्रमा के दक्षिणी गोलार्ध का तीसरा सबसे गहरा गर्त है, जिसका व्यास 190 किमी और गहराई 8 किमी है। रूसी स्पेस एजेंसी काक हना है कि लूना-25 से मिली अब तक की जानकारी के मुताबिक, चांद की मिट्टी में रासायनिक तत्वों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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