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इजराइल के वो 5 सीक्रेट जिसके आगे घुटने टेकती हैं सुपरपावर्स, बड़ों-बड़ों पर कुछ ऐसे भारी पड़ता है छोटा सा देश?

Iran Missile Attack on Israel: दुश्मनों से घिरा होने के बावजूद इजराइल अपनी तकनीक और मोसाद के भरोसे हमेशा सुरक्षित रहता आया है। मोसाद ने अपने सटीक इंजेलीजेंस और ताकत का प्रमाण तब दिया जब बीते दिनों उसने लेबनान में हिजबुल्लाह के लड़ाकों में पेजर ब्लास्ट किए और बाद में हसन नसरल्लाह को मार गिराया।

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Iran vs Israel

Photo : iStock

Iran Missile Attack on Israel: बीते साल 8 अक्टूबर को जब हमास ने इजराइल पर हमला किया तो उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद लेकर कई सवाल उठे थे। कहा जाने लगा था कि मोसाद अब कमजोर हो गई है। इजराइल चुप रहा, लेकिन उसने अपने जासूसों को एक्टिव कर दिया। इसके बाद जो हुआ वो पूरी दुनिया ने देखा। इजराइल ने गाजा में न केवल हमास की कमर तोड़ी बल्कि तेहरान में हमास के नेता इस्माइल हानियेह को भी मार गिराया।

इसके बाद मोसाद ने अपने सटीक इंजेलीजेंस और ताकत का प्रमाण तब दिया जब बीते दिनों उसने लेबनान में हिजबुल्लाह के लड़ाकों में पेजर ब्लास्ट किए। इन हमलों से हिजबुल्लाह उबर भी नहीं पाया था कि इजाराइली मिसाइलों ने हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह को निशाना बनाया और उसकी मौत हो गई। इसके बाद दुनिया ने फिर से इजराइल और उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद का लोहा माना।

दुश्मनों से घिरा होने के बावजूद इजराइल अपनी तकनीक और मोसाद के भरोसे हमेशा सुरक्षित रहता आया है। इतना ही नहीं उसके एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम का भी कोई तोड़ नहीं है। इजराइल का यह सिस्टम दुनिया में सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं इजराइल के वो 5 सीक्रेट, जिनकी बदौलत यह छोटा सा देश बड़ों-बड़ों पर भारी पड़ता आया है...

1. आयरन डोम

इजराइल का एयर डिफेंस दुनिया में सबसे बेहतर माना जाता है। इजराइल ने इस सिस्टम से अपनी सीमाओं को लैस किया है। यह सिस्टम दुश्मन देश से इजराइल की तरफ आने वाली मिसाइलों को हवा में ही तबाह कर देता है। खास बात यह है कि इसका रडार मिसाइल या रॉकेट का पीछा करता है और उसके टॉरगेट का आकलन करता है। अगर मिसाइल गैर रिहायशी इलाकों में गिर रही है तो आयरन डोम इसे नजरअंदाज करता है, लेकिन अगर इनका निशाना इजराइल के रिहायशी इलाके हैं तो आयरन का लॉन्चर इंटरसेप्ट करने के लिए मिसाइल लॉन्च करता है।

2. डेविड्स स्लिंग

इजराइल के पास आयरन डोम के अलावा डिवड्स स्लिंग जैसा सिस्टम भी है। इसमे इजराइल और अमेरिका ने मिलकर डेवलप किया है। इसका इस्तेमाल मध्यम से लंबी दूरी के रॉकेटों के साथ बैलिस्टक और क्रूज मिसाइलों को रोकने के लिए किया जाता है। कहा जा रहा है ईरान ने जब इजराइल पर मिसाइलें दागीं तब डिवड्स स्लिंग ने ही उन्हें नेस्तनाबूत कर दिया।

3. मोसाद

यह इजराइल के अचूक और अभेद डिफेंस सिस्टम की रीढ़ है। मोसाद इजराइल की खुफिया एजेंसी है और कहा जाता है कि दुनिया का ऐसा कोई इलाका नहीं जो मोसाद के जासूसों की पहुंच से दूर हो। इसी इंटेलीजेंस एजेंसी की बदौलत इजराइल ने कई खतरनाक ऑपरेशन्स को अंजाम दिया है। हाल ही में हमास नेता इस्माइल हानियेह की मौत, लेबनान में पेजर ब्लास्ट और हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लाह की मौत पर दुनिया ने मोसाद की ताकत देखी थी।

4. जीडीपी

इजराइल छोटा देश होने के बावजूद आर्थिक रूप से बेहद मजबूत है। साल 2023 में इसकी जीडीपी 564 अरब डॉलर थी और यहां की प्रति व्यक्ति आय 58 हजार डॉलर रही। ऐसे में इजराइल अपनी मजबूती के लिए काफी कुछ खर्च करता है।

5. डिफेंस बजट

इजराइल रक्षा क्षेत्र में काफी खर्च करता है। जानकारी के मुताबिक, इजराइल का रक्षा बजट 23.4 बिलियन डॉलर है। यह यहां की कुल जीडीपी का 4.5 फीसदी है। जीडीपी के आधार पर देखें तो डिफेंस बजट मामले में यह दुनिया चौथा देश है। इस मामले में रूस, अमेरिका, भारत और चीन भी इससे पीछे हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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