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ईरान परमाणु वार्ता के लिए हुआ तैयार, अमेरिका नहीं इन 3 यूरोपीय देशों के साथ होगी बैठक

Iran E3 Powers: ईरान और तीन यूरोपीय देश फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन, जिन्हें सामूहिक रूप से ई3 कहा जाता है तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने पर सहमत हो गए हैं। तीनों यूरोपीय देश पिछले कुछ महीनों से ईरान को स्नैपबैक मैकेनिज्म लागू करने की धमकी दे रहे हैं।

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ईरान, ई3 परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने पर हुए सहमत

Iran Nucealr Deal: ईरान और तीन यूरोपीय देश फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन, जिन्हें सामूहिक रूप से ई3 कहा जाता है तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने पर सहमत हो गए हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और ई3 वार्ता की तारीख और स्थान पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आगामी वार्ता उप विदेश मंत्रियों के स्तर पर होने की उम्मीद है। ईरान और ई3 देशों ने सितंबर 2024 से तेहरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने सहित अन्य मुद्दों पर कई दौर की बातचीत की है।

ईरान को स्नैपबैक मैकेनिज्म लागू करने की धमकी

तीनों यूरोपीय देश पिछले कुछ महीनों से ईरान को स्नैपबैक मैकेनिज्म लागू करने की धमकी दे रहे हैं। यह ईरान और विश्व शक्तियों के बीच 2015 में हस्ताक्षरित संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) का एक खंड है, जो ईरान द्वारा समझौते का पालन न करने पर अन्य पक्षों को सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को फिर से लागू करने की अनुमति देता है।तेहरान ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर यह मैकेनिज्म लागू किया गया तो वह ई3 देशों के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया देगा।

ईरानी विदेश मंत्री ने दी चेतावनी

इस बीच, ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी (ई3) को तेहरान पर प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के लिए स्नैपबैक मैकेनिज्म लागू करके संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की विश्वसनीयता को कम नहीं करना चाहिए। एक्स पर एक पोस्ट में अराघची ने कहा कि ई3 के पास 2015 के परमाणु समझौते के प्रावधानों या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 को लागू करने के लिए कानूनी, राजनीतिक और नैतिक आधार का अभाव है, जो ईरान द्वारा समझौते का पालन न करने पर उस पर फिर से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि 2018 में अमेरिका द्वारा संयुक्त व्यापक कार्य योजना से हटने के बाद, ईरान ने सुधारात्मक उपाय करने से पहले ही विवाद समाधान तंत्र को समाप्त कर दिया, जबकि ई3 अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने में विफल रहा और यहां तक कि अमेरिका की अधिकतम दबाव नीति का समर्थन भी किया। अराघची ने कहा कि ई3 को ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचना चाहिए जिससे सुरक्षा परिषद में मतभेद और गहराएं या उसके कामकाज पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ें। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान सार्थक कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन शत्रुतापूर्ण उपायों का विरोध करेगा।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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