India calls for ceasefire in Gaza- गाजा में जारी मानवीय संकट पर चिंता जताते हुए, भारत ने जोर देकर कहा कि युद्धविराम लागू किया जाना चाहिए। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि बीच-बीच में रुकावटें क्षेत्र के लोगों के सामने मौजूद चुनौतियों के पैमाने का समाधान करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक खुली बहस को संबोधित करते हुए कहा कि आज की बैठक गाजा में जारी मानवीय संकट की पृष्ठभूमि में हो रही है।
बीच-बीच में रुकावटें पैदा कर रहीं चुनौतियां
हरीश ने 'मध्य पूर्व की स्थिति' पर खुली बहस में कहा, शत्रुता में बीच-बीच में रुकावटें लोगों के सामने मौजूद मानवीय चुनौतियों के पैमाने का समाधान करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, जो रोजाना भोजन और ईंधन की भारी कमी, अपर्याप्त चिकित्सा सेवाओं और शिक्षा तक पहुंच की कमी से जूझते हैं। आगे का रास्ता साफ होने पर जोर देते हुए और इस संबंध में भारत के दृढ़ रुख़ पर प्रकाश डालते हुए हरीश ने कहा कि मानवीय पीड़ा को जारी नहीं रहने देना चाहिए।
उन्होंने कहा, मानवीय सहायता सुरक्षित, निरंतर और समय पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। शांति का कोई विकल्प नहीं है। युद्धविराम लागू होना चाहिए। सभी बंधकों को रिहा किया जाना चाहिए। इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है। इसके अलावा कोई और उपाय नहीं है।
फिलिस्तीनियों के साथ ऐतिहासिक और मजबूत संबंध
उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर आगामी संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वि-राष्ट्र समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। जुलाई माह के लिए सुरक्षा परिषद की पाकिस्तान की अध्यक्षता में आयोजित परिषद की बहस में हरीश ने कहा कि भारत के अपने फिलिस्तीनी भाइयों और बहनों के साथ ऐतिहासिक और मजबूत संबंध हैं। उन्होंने कहा, हम हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं और फिलिस्तीनी हितों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटूट है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश था।
6,50000 से अधिक बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित
गाजा में स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति को विशेष रूप से चिंताजनक बताते हुए, हरीश ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि गाजा के लगभग 95 प्रतिशत अस्पताल क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, 6,50,000 से अधिक बच्चे 20 महीनों से ज्यादा समय से स्कूली शिक्षा से वंचित हैं। हरीश ने कहा कि भारत 28-30 जुलाई को होने वाले द्वि-राष्ट्र समाधान के कार्यान्वयन पर उच्च-स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन पर ध्यान देता है। हरीश ने कहा कि हमें उम्मीद है कि यह सम्मेलन एक प्रगतिशील और रचनात्मक पहल के साथ द्वि-राष्ट्र समाधान प्राप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे राजनीतिक क्षितिज को आकार देने के प्रयासों में योगदान देने के लिए अपनी तत्परता पर बल देता है जो फिलिस्तीनियों के लिए आशा की किरण जगाए और मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करे।
