दुनिया

ब्रिटेन का रूस पर बड़ा एक्शन, रासायनिक हथियारों से जुड़े 9 लोगों और संस्थाओं पर लगाए प्रतिबंध

ब्रिटेन ने जिन संस्थानों पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें रूस का सरकारी वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान एससी सिग्नल और राज्य वैज्ञानिक अनुसंधान एवं सैन्य चिकित्सा परीक्षण संस्थान (GNIIII VM) भी शामिल हैं। इसके अलावा कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों को भी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है।

Image

ब्रिटेन का रूस पर बड़ा एक्शन। (फोटो- AI)

लंदन: ब्रिटेन ने रूस पर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए रासायनिक हथियारों के विकास से जुड़े सात रूसी नागरिकों और दो वैज्ञानिक संस्थानों पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। ब्रिटिश सरकार का आरोप है कि ये लोग और संस्थाएं विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी को कथित तौर पर जहर देने और वर्ष 2018 में इंग्लैंड के सैलिसबरी में पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रिपाल पर हुए हमले में इस्तेमाल किए गए रासायनिक हथियारों के विकास में शामिल थे।

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रतिबंधित व्यक्तियों और संस्थानों का संबंध 'एपिबैटिडीन' नामक विषैले पदार्थ और 'नोविचोक' के विकास से है। ब्रिटेन का दावा है कि एपिबैटिडीन का इस्तेमाल 2024 में आर्कटिक क्षेत्र की एक दंड कॉलोनी में नवलनी को जहर देने के लिए किया गया था, जबकि नोविचोक रासायनिक हथियार का उपयोग 2018 में सैलिसबरी में स्क्रिपाल और उनकी बेटी पर हुए हमले में किया गया था। उस घटना में दोनों गंभीर रूप से बीमार हो गए थे और स्थानीय निवासी डॉन स्टर्जेस की मौत हो गई थी।

ब्रिटेन ने किन संस्थाओं पर लगाए प्रतिबंध

ब्रिटेन ने जिन संस्थानों पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें रूस का सरकारी वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान एससी सिग्नल और राज्य वैज्ञानिक अनुसंधान एवं सैन्य चिकित्सा परीक्षण संस्थान (GNIIII VM) भी शामिल हैं। इसके अलावा कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों को भी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है।

ब्रिटेन की गृह मंत्री इवेट कूपर ने कहा कि रूस द्वारा बार-बार रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है और यह वैश्विक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा करता है।

आर्कटिक में भी बढ़ा तनाव

इस बीच ब्रिटेन ने आर्कटिक क्षेत्र में रूस की सैन्य गतिविधियों पर भी चिंता जताई है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कुछ तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें ब्रिटिश एफ-35 लड़ाकू विमान नॉर्वेजियन सागर में एक रूसी बेयर-एफ समुद्री गश्ती विमान को रोकते हुए दिखाई दे रहे हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी विमान ब्रिटेन के विमानवाहक पोत एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स के बेहद करीब पहुंच गया था और उसने उसके आसपास बड़ी संख्या में सोनोबॉय भी गिराए। ये ऐसे उपकरण होते हैं जिनका इस्तेमाल समुद्र में पनडुब्बियों और अन्य नौसैनिक जहाजों का पता लगाने के लिए किया जाता है।

ब्रिटेन बोला- रूसी विमान की गतिविधि 'असुरक्षित और गैर-पेशेवर'

ब्रिटेन ने रूसी विमान की इस गतिविधि को 'असुरक्षित और गैर-पेशेवर' करार दिया। मंत्रालय के मुताबिक, इसके बाद एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स से उड़ान भरने वाले दो एफ-35 लड़ाकू विमानों ने रूसी विमान को इंटरसेप्ट किया और उसके क्षेत्र से बाहर निकलने तक उसकी निगरानी की। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब नाटो के तहत ब्रिटेन के युद्धपोत आर्कटिक क्षेत्र में तैनात हैं और रूस के साथ पश्चिमी देशों का तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

और पढ़ें
End of Article