Kuwait Fire Death: कुवैत अग्निकांड में मारे गए अब लोगों में से अब तक 45 भारतीय नागरिकों के शवों की पहचान हो पाई है। एक लाश की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। लाशों को भारत लाने के लिए वायुसेना के विमान कुवैत पहुंच चुके हैं। विदेश राज्यमंत्री भी कुवैत में ही है।
कुवैत अग्निकांड में मारे गए हैं 49 लोग
कुवैत के अधिकारियों ने विदेशी श्रमिकों के आवास वाली एक इमारत में आग लगने की घटना में मारे गए 45 भारतीयों और फिलीपीन के तीन नागरिकों के शवों की पहचान कर ली है। कुवैत ने घटना की त्वरित जांच करने और मृतकों के शवों को भेजने में पूर्ण सहयोग करने का आश्वासन दिया है। अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र ‘अरब टाइम्स’ की खबर के अनुसार प्रथम उप प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री शेख फहद अल-यूसुफ अल-सबा ने कहा कि अधिकारियों ने 48 शवों की पहचान कर ली है, जिनमें 45 भारतीय और तीन फिलीपीन के नागरिक हैं।
प्रथम उप प्रधानमंत्री ने कहा कि शेष एक शव की पहचान के प्रयास अब भी जारी हैं।
भारतीय वायुसेना का विमान तैयार
घटना में मारे गए भारतीयों के शवों को वापस लाने के लिए भारतीय वायुसेना का एक विमान तैयार रखा गया है। घटना में घायल हुए भारतीयों को दी जाने वाली सहायता का जायजा लेने तथा मृतकों के शवों की शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए कुवैत पहुंचे विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कुवैत के विदेश मंत्री अब्दुल्ला अली अल-याह्या से मुलाकात की, जिन्होंने पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया तथा त्रासदी की शीघ्र जांच करने की प्रतिबद्धता जताई।
कुवैत की इमारत में कैसे लगी आग
दक्षिणी शहर मंगाफ में बुधवार को सात मंजिला इमारत में आग लगने से कम से कम 49 विदेशी श्रमिकों की मौत हो गई और 50 अन्य घायल हो गए। इस इमारत में 196 प्रवासी श्रमिक रह रहे थे। कुवैत के सरकारी वकील ने घटना की जांच शुरू कर दी है। सरकारी वकील ने ‘एक्स’ पर कहा कि जांच का उद्देश्य घटना के पीछे की परिस्थितियों और आग लगने के कारणों का पता लगाना है। आग कैसे लगी या किस वजह से लगी, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। स्थानीय मीडिया ने बताया कि इमारत के भूतल से गैस लीक होना एक कारण हो सकता है। कुवैत अग्निशमन विभाग के जांच प्रमुख कर्नल सईद अल-मौसवी ने कहा कि आग के कारणों की जांच कर रही टीम ने पाया कि अपार्टमेंट और कमरों के बीच ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था, जिसके कारण काला धुआं उठा। उन्होंने कहा कि कई पीड़ितों का सीढ़ियों से नीचे उतरने की कोशिश करते समय दम घुट गया, क्योंकि सीढ़ियों पर घना धुआं पसर गया था। उन्होंने कहा कि पीड़ित छत पर नहीं जा सके, क्योंकि दरवाजा बंद था।
