क्‍या है महिलाओं से जुड़ा वह मसला, जिसे लेकर तुर्की में एर्दोआन के खिलाफ सड़कों पर उतर आई आधी आबादी

तुर्की में राष्‍ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन के खिलाफ महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं। महिलाओं का यह विरोध काउंसिल ऑफ यूरोप्स इस्तांबुल' संधि से तुर्की के बाहर निकलने को लेकर है।

क्‍या है महिलाओं से जुड़ा वह मसला, जिसे लेकर तुर्की में एर्दोआन के खिलाफ सड़कों पर उतर आई आधी आबादी
क्‍या है महिलाओं से जुड़ा वह मसला, जिसे लेकर तुर्की में एर्दोआन के खिलाफ सड़कों पर उतर आई आधी आबादी  |  तस्वीर साभार: AP

मुख्य बातें

  • तुर्की 'काउंसिल ऑफ यूरोप्स इस्तांबुल' संधि से औपचारिक तौर पर बाहर हो गया है
  • एर्दोआन सरकार के इस फैसले के खिलाफ तुर्की में महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं
  • समझा जाता है कि एर्दोआन सरकार ने रूढ़िवादियों के दबाव में यह फैसला लिया है

इस्तांबुल : तुर्की के राष्‍ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन आधी आबादी के निशाने पर हैं। महिलाएं उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आई हैं। वे 'काउंसिल ऑफ यूरोप्स इस्तांबुल' संधि से तुर्की के बाहर निकलने का विरोध रही हैं। तुर्की ने इसका ऐलान काफी पहले ही किया था, जिससे अब वह औपचारिक तौर पर अलग हो गया है। इसके बाद महिलाओं का गुस्‍सा एर्दोआन सरकार के खिलाफ भड़क गया है।

एर्दोआन सरकार के फैसले का विरोध

इस मसले को लेकर तुर्की में इस्‍तांबुल की सड़कों पर महिलाओं ने प्रदर्शन किया। तुर्की इस संधि से 1 जुलाई को औपचारिक तौर पर बाहर निकल गया, जिसे वह तकरीबन 10 साल पहले 2011 में जुड़ा था। महिलाओं को हिंसा से बचाने में अहम समझे वाले इस अंतरराष्‍ट्रीय समझौते से तुर्की ने इस साल मार्च में बाहर होने की घोषणा की थी, जिसके बाद से ही यहां महिलाओं का आक्रोश फूट पड़ा है।

Protesters, left, clash with police officers preventing them from marching against the government's decision to withdraw from Istanbul Convention, in Istanbul, Thursday, July 1, 2021. Turkey formally withdrew Thursday from a landmark international treaty protecting women from violence, and signed in its own city of Istanbul, though President Recep Tayyip Erdogan insisted it won’t be a step backwards for women. Hundreds of women demonstrated in Istanbul later Thursday, holding banners that said they won't give up on the Council of Europe’s Istanbul Convention. (AP Photo/Kemal Aslan)

तुर्की में बीते कुछ महीनों से एर्दोआन सरकार के इस फैसले का विरोध हो रहा है। इस्‍तांबुल सहित देश के कई शहरों में महिलाएं इसके विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं और समझौते की बहाली की मांग कर रही हैं। तुर्की के इस कदम को महिलाओं की सुरक्षा और उन्‍हें हिंसा से बचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है, जिसकी आलोचना यूरोपीय कार्यकर्ताओं ने भी की है।

रूढ़‍िवादी नहीं थे खुश

महिला कार्यकर्ताओं ने एर्दोआन सरकार के इस फैसले को 'विनाशकारी' करार दिया है। इसे कट्टरपंथियों के दबाव में लिया गया फैसला बताया जा रहा है। तुर्की को लेकर जो रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, उसके मुताबिक, इस संधि में महिलाओं के हक में कई ऐसी बातों का जिक्र है, जिसे तुर्की के रूढ़िवादी पसंद नहीं करते हैं। वे इसे पारिवारिक संरचनाओं को कमजोर करने वाला मानते रहे हैं।

Protesters clash with police officers preventing them from marching against the government's decision to withdraw from Istanbul Convention, in Istanbul, Thursday, July 1, 2021. Turkey formally withdrew Thursday from the landmark international treaty protecting women from violence, and signed in its own city of Istanbul, though President Recep Tayyip Erdogan insisted it won't be a step backwards for women. Women, LGBT groups and others have been protesting the decision, saying the convention's pillars of prevention, protection, criminal prosecution and policy coordination, as well as its identification of gender-based violence, are crucial to protecting women in Turkey. (AP Photo/Kemal Aslan)

इस्तांबुल संधि के नाम से चर्चित इस अंतरराष्‍ट्रीय समझौते में महिलाओं के खिलाफ लैंगिक हिंसा रोकने, पीड़ितों की रक्षा करने और अपराधियों पर मुकदमा चलाने के लिए कदम उठाने की जिम्‍मेदारी सरकारी अधिकारियों को सौंपने का प्रावधान है, जिससे तुर्की का एक वर्ग नाखुश था। जिन लोगों ने इस संधि की समीक्षा की वकालत की थी, उसमें एर्दोआन की पार्टी के कुछ पदाधिकारी भी शामिल रहे हैं। 

तुर्की की एर्दोआन सरकार ने महिलाओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित वाले इस समझौते से बाहर होने के बाद इस दिशा में एक अलग कार्ययोजना की घोषणा की है। इसमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए न्यायिक प्रक्रियाओं की समीक्षा, संरक्षण सेवाओं में सुधार और हिंसा पर आंकड़े जुटाने जैसे लक्ष्यों को शामिल किया गया है। हालांकि तुर्की की महिलाएं इससे संतुष्‍ट नहीं हैं, वे इस्‍तांबुल संधि को बहाल करने की मांग पर अड़ी हैं।

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