कौन है 18 साल की डारनेला फ्रेजियर, जिसे एक वीडियो ने दिलाया विशेष पुलित्‍जर अवार्ड

अमेरिका में बीते साल जॉर्ज फ्लॉयड की मौत ने नस्‍ली भेदभाव को उजागर किया था। रास्‍ते से गुजर रही 17 साल की किशोरी ने इसका वीड‍ियो बनाया था, जिसे विशेर्ष पुलित्‍जर अवॉर्ड दिया गया है।

डारनेला (दाएं से तीसरी) एक रिश्तेदार के साथ घटनास्थल के पास से पैदल गुजर रही थीं, जब उन्‍होंने अपने फोन से वीडियो शूट किया
डारनेला (दाएं से तीसरी) एक रिश्तेदार के साथ घटनास्थल के पास से पैदल गुजर रही थीं, जब उन्‍होंने अपने फोन से वीडियो शूट किया  |  तस्वीर साभार: AP

वाशिंगटन : बीते साल अमेरिका में पुलिस की कार्रवाई में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत ने यहां के समाज में गहरे व्‍याप्‍त नस्‍ली भेदभाव को उजागर किया था। 25 मई, 2020 को हुई उस घटना ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में थी। अमेरिका में लोग इस घटना के विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। आगे चलकर इस घटना ने 3 नवंबर, 2020 को हुए अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव पर भी गहरा असर डाला, जिसका नतीजा अंतत: सत्‍ता परिवर्तन के रूप में सामने आया। अब उस घटना को रिकॉर्ड करने वाली 18 साल की किशोरी को विशेष पुलित्‍जर अवॉर्ड से नवाजा गया है।

पुलित्जर अवॉर्ड पत्रकारिता के क्षेत्र में अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है। पुलित्जर प्राइज बोर्ड ने 18 साल की डारनेला फ्रेजियर को उनके साहस के लिए विशेष प्रशस्ति-पत्र से नवाजा है। पुलित्जर प्राइज बोर्ड डारनेला के साहस की तारीफ करते हुए कहा कि इस वीडियो ने सच्चाई एवं न्याय की तलाश में नागरिकों की अहम भूमिका को रेखांकित किया है, जिसकी तलाश पत्रकारों को होती है।

वह डारनेला ने ही वीडियो बनाया था, जिसमें मिनियापोलिस पुलिस के एक श्‍वेत अधिकारी को अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड को गिरफ्तारी के बाद जमीन पर गिराते और फिर उसकी गर्दन को घुटने से कुछ सेकेंड तक दबाते देखा गया था। इस दौरान फ्लॉयड को बार-बार 'I can't breath (मैं सांस नहीं ले पा रहा) कहते सुना गया, लेकिन अधिकारी ने इसके बावजूद अपना घुटना फ्लॉयड की गर्दन से नहीं हटाया।

रिश्‍तेदार के साथ पैदल गुजर रही थीं डारनेला

डारनेला ने जब यह वीडियो शूट किया था, वह अपने एक रिश्तेदार के साथ घटनास्थल के पास से पैदल गुजर रही थीं। यह डारनेला का बनाया वीडियो ही था, जिसे पूरी दुनिया ने देखा और अमेरिका में नस्‍ली भेदभाव को उजागर किया। इसने अमेरिका ही नहीं, दुनिया के तमाम देशों में लोगों को गुस्से से भर दिया था और नस्‍ली भेदभाव के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। यह वीडियो जॉर्ज फ्लॉयड के केस में अहम सबूत था। इसने न सिर्फ फ्लॉयड को न्याय दिलवाया, बल्कि पूरे अमेरिका में नस्ली भेदभाव के खिलाफ एक बड़े आंदोलन को जन्म दिया।

जॉर्ज फ्लॉयड मौत केस में अदालत ने जिन साक्ष्‍यों के आधार पर पूर्व पुलिस अधिकारी डेरेक शॉविन को हत्‍या का दोषी ठहराया, उनमें यह वीडियो अहम था। डारनेला ने इस केस में अदालत में गवाही भी दी थी और कहा था कि उसने इसलिए उस वक्‍त अपनी जेब से फोन निकालकर वीडियो बनाना शुरू किया, क्‍योंकि वहां एक आदमी अपनी जान की भीख मांग रहा था और पुलिस अफसर फिर भी उसका उत्‍पीड़न कर रहा था। डारनेला ने अपनी गवाही में यह भी कहा था कि वह जॉर्ज फ्लॉयड को ये कहते सुन पा रही थीं कि वह सांस नहीं ले पा रहे हैं। वह लगातार अपनी मां को भी बुला रहे थे।

डारनेला उस वक्‍त 17 साल की थीं, जब उन्‍होंने 25 मई, 2020 को अफ्रीकी मूल के 46 वर्षीय अश्वेत अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की गिरफ्तारी और पुलिस की दमनात्‍मक कार्रवाई में उनकी मौत की घटना को रिकॉर्ड किया था। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान जब वह बतौर गवाह पेश हुईं तो यह कहते हुए रो पड़ीं कि 'जब मैं जॉर्ज फ्लॉयड को देखती हूं तो अपने पिता, भाई और अपने अन्‍य रिश्‍तेदारों को भी देखती हूं, क्योंकि वे सब अश्‍वेत हैं और हमेशा इस डर के साये में जीती हूं कि उस दिन जॉर्ज फ्लॉयड की जगह इनमें से भी कोई हो सकता था।' डारनेला ने यह भी कहा कि इस घटना ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदलकर रख दिया।

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