आंतरिक मामलों में हस्‍तक्षेप, UN चीफ, ब्रिटिश सांसदों ने किसान आंदोलन पर की टिप्‍पणी, भारत जता चुका है विरोध

दुनिया
भाषा
Updated Dec 05, 2020 | 21:59 IST

कृषि कानूनों के खिलाफ राष्‍ट्रीय राजधानी में किसानों के प्रदर्शन को लेकर संयुक्‍त राष्‍ट्र और ब्रिटेन के 36 सांसदों ने टिप्‍प्‍णी की है। भारत पहले ही विदेशी नेताओं की टिप्‍पणी पर अपना विरोध जता चुका है।

आंतरिक मामलों में हस्‍तक्षेप, UN चीफ, ब्रिटिश सांसदों ने किसान आंदोलन पर की टिप्‍पणी, भारत जता चुका है विरोध
आंतरिक मामलों में हस्‍तक्षेप, UN चीफ, ब्रिटिश सांसदों ने किसान आंदोलन पर की टिप्‍पणी, भारत जता चुका है विरोध  |  तस्वीर साभार: AP, File Image

संयुक्त राष्ट्र/लंदन : संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता और ब्रिटेन के विभिन्न दलों के 36 सांसदों ने भारत में जारी किसानों के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा है कि लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है और अधिकारियों को उन्हें यह करने देना चाहिए। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी पहले की एक टिप्पणी पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद भी प्रदर्शनकारी किसानों के प्रति समर्थन दोहराया। ट्रूडो ने पहले कहा था कि कनाडा हमेशा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के अधिकारों का समर्थन करेगा।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने शुक्रवार को कहा, 'जहां तक भारत का सवाल है तो मैं वही कहना चाहता हूं कि जो मैंने इन मुद्दों को उठाने वाले अन्य लोगों से कहा है कि लोगों को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का अधिकार है और अधिकारियों को उन्हें यह करने देना चाहिए।' दुजारिक भारत में किसानों के प्रदर्शन से जुड़े एक सवाल पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

ब्रिटिश सांसदों ने क्‍या कहा?

हजारों किसान सितंबर में भारत में लागू तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग करते हुए 26 नवंबर से राजधानी दिल्ली की अनेक सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। ब्रिटेन में विभिन्न दलों के 36 सांसदों के एक समूह ने विदेश मंत्री डॉमिनिक राब को पत्र लिखकर उनसे कहा है कि भारत में नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के ब्रिटिश पंजाबी लोगों पर प्रभाव के बारे में वह अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर को अवगत कराएं।

पत्र में कहा गया है कि यह ब्रिटेन में सिखों और पंजाब से जुड़े लोगों के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय है, हालांकि अन्य भारतीय राज्यों पर भी इसका खासा प्रभाव पड़ता है। कई ब्रिटिश सिखों और पंजाबी लोगों ने अपने सांसदों के समक्ष इस मामले को उठाया है, क्योंकि वे पंजाब में परिवार के सदस्यों और पैतृक भूमि से सीधे प्रभावित हैं। यह पत्र शुक्रवार को जारी किया गया और इसे लेबर पार्टी के सिख सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने तैयार किया है। इस पर भारतीय मूल के कई सांसदों के हस्ताक्षर हैं। इन नेताओं में वीरेंद्र शर्मा, सीमा मल्होत्रा ​​और वेलेरी वाज़ के साथ ही जेरेमी कॉर्बिन भी शामिल हैं।

सांसदों के इस पत्र में मंत्री से आग्रह किया गया है कि वह 'पंजाब में बिगड़ती स्थिति' पर चर्चा करने के लिए उनके साथ तत्काल बैठक करें। इसके साथ ही इस मुद्दे पर भारत सरकार के साथ विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) के किसी भी संवाद के बारे में अद्यतन जानकारी देने की मांग की। एफसीडीओ ने कहा कि उसे अभी तक पत्र नहीं मिला है।

भारत जता चुका है विरोध

भारत ने किसान प्रदर्शनों के बारे में विदेशी नेताओं की टिप्पणियों को 'भ्रामक' और 'गैर जरूरी' बताया और कहा कि यह एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों से जुड़ा विषय है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने विदेशी नेताओं की टिप्पणियों के बारे में मंगलवार को कहा था, 'हमने भारत में किसानों से संबंधित कुछ ऐसी टिप्पणियों को देखा है जो भ्रामक सूचनाओं पर आधारित हैं। इस तरह की टिप्पणियां अनुचित हैं, खासकर जब वे एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों से संबंधित हों।'

मंत्रालय ने एक कड़े संदेश में कहा, 'बेहतर होगा कि कूटनीतिक बातचीत राजनीतिक उद्देश्यों के लिए गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं की जाएं।' भारत ने शुक्रवार को कनाडा के उच्चायुक्त नादिर पटेल को तलब कर उनसे कहा कि किसानों के आंदोलन के संबंध में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और वहां के कुछ अन्य नेताओं की टिप्पणी देश के आंतरिक मामलों में एक 'अस्वीकार्य हस्तक्षेप' के समान है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडाई राजनयिक से यह भी कहा गया गया कि ऐसी गतिविधि अगर जारी रही तो इससे द्विपक्षीय संबंधों को 'गंभीर क्षति' पहुंचेगी। ऑस्ट्रेलिया में दक्षिण ऑस्ट्रेलियाई संसद में सदस्य तुंग गो ने बुधवार को भारत सरकार से आग्रह किया था कि किसी भी लोकतंत्र में उसके नागरिकों को मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल करने की अनुमति होनी चाहिए और यहां यह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना है। हालांकि भारत में किसानों के प्रदर्शन पर सरकार ने बार-बार यही कहा है कि नए कृषि कानूनों से किसानों को बेहतर अवसर मिलेंगे और कृषि में नयी प्रौद्योगिकियां आएंगी।

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