"तालिबानी बर्बरता" का भयानक रूप, अफगानिस्तान में बरपा रहे कहर, क्या फिर दोहराएगा इतिहास!

दुनिया
रवि वैश्य
Updated Jul 16, 2021 | 15:42 IST

Taliban Barbarism in Afganistan:"तालिबान" फिर से सुर्खियों में है वजह है अफगानिस्तान में इनका फिर से सिर उठाना और इस दफा ये काफी तेजी से अपना विस्तार करने में लगे हैं।

Taliban in Afganistan
तालिबान के अफगानिस्तान में बढ़ रहे प्रभाव का ये असर है कि वहां की अवाम बेहद सहमी हुई है  |  तस्वीर साभार: AP

मुख्य बातें

  • अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद एक बार फिर से तालिबान सिर उठा रहा है
  • तालिबानी उभार के बाद उसकी चिर परिचित बर्बरता सामने आने लगी है
  • तालिबान अपनी मध्यकालीन सोच को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है

दुनिया के नक्शे पर अफगानिस्तान (Afganistan) को एक मुल्क के तौर पर अहम मुकाम हासिल है इसकी वजह है कि इसका काफी समृद्ध इतिहास मगर पिछले तमाम सालों से इस मुल्क को ना जाने किसकी नजर लग गई कि वहां हालात संभलने में ही नहीं आ रहे हैं वहां पिछले कई सालों से युद्ध की विभीषिका झेलते हुए अवाम की करीब एक पीड़ी अपने बचपन से जवानी की दहलीज छूने के करीब आ गई लेकिन हालात जस के तस हैं बल्कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना (US Army) की वापसी के बाद एक बार फिर से तालिबान (Taliban) सिर उठा रहा है और भी काफी आक्रमकता के साथ, इन सबके बीच पिस रही है अफगानी अवाम जिसका पुरसाहाल कोई नहीं....

"तालिबान" पश्तो भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञानार्थी (छात्र)... ऐसे छात्र, जो इस्लामिक कट्टरपंथ की विचारधारा पर यकीन करते हैं तालिबान इस्लामिक कट्टपंथी राजनीतिक आंदोलन हैं। सबको पता है कि अफगानिस्तान में 20 सालों के टकराव के बाद अमेरिका अब अपनी सेना वापस बुला रहा है और अगस्त 2021 के खत्म होते-होते ये भी पूरी हो जाएगी।

एक बार फिर से अफगानिस्तान में तालिबानी उभार उनकी चिर परिचित बर्बरता सामने आने लगी है, अमेरिकी सेना की वापसी के समानांतर ही तालिबानी बढ़त भी जारी है तालिबान का दावा है कि उसने देश के ज्यादातर  हिस्से पर कब्जा कर लिया है, ऐसे में इस आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में समूचा अफगानिस्तान एकबार फिर तालिबान के पास चला जाएगा।

सामने आने लगी है तालिबान की "मध्यकालीन सोच"

तालिबान देश के बड़े भूभाग को अपने नियंत्रण में ले चुका है अब वह हमले कर आईटी एवं अन्य बुनियादी संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने में जुटा है बताते हैं कि देश के तमाम इलाकों को अपने नियंत्रण में लेने वाला तालिबान अपनी मध्यकालीन सोच को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है इसकी बानगी उस वक्त सामने आई जब हाल के दिनों में उसने देश में बिजली के टावर गिराए हैं और कई जगहों पर उसने विस्फोट से फाइबर ऑप्टिक्स उपकरणों को उड़ा दिया है, एटीआरए की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन महीनों में तालिबान ने देश भर में दूरसंचार के 28 टावरों को गिराया है जिससे लोगों को इंटरनेट कनेक्शन की भारी दिक्कत हो गई है, तालिबानी एजेंडे में ये आम बात है।

अवाम प्लास्टिक के टेंट और गंदगी भरे माहौल में रहने को मजबूर 

तालिबान के अफगानिस्तान में बढ़ रहे प्रभाव का ये असर है कि वहां की अवाम बेहद सहमी हुई है कि क्या पता कब क्या हो जाए, वहीं तालिबान की सक्रियता बढ़ने के कारण हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं, तालिबानी स्थानीय लोगों के गांव पर कब्जा कर रहे हैं साथ ही अपनी कट्टर सोच के चलते स्कूलों को भी जलाकर खाक करने में जुटे हैं, वहीं इस स्थिति के चलते तमाम अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं चिलचिलाती गर्मी में लोग प्लास्टिक के टेंट और गंदगी भरे माहौल में रहने को मजबूर हैं। सूत्रों के मुताबिक तालिबानी गतिविधियों के बढ़ने के कारण पिछले 15-20 दिनों में 56,000 से अधिक परिवार अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जिनमें से अधिकतर देश के उत्तरी हिस्से से हैं।

"तालिबानी सजा" ऐसी कि रूह तक कांप जाए-

  • तालिबानी इलाकों में शरीयत का उलंघन करने पर बहुत ही क्रूर सजा दी जाती है
  • चोरों के हाथ-पैर काटे जाएंगे वहीं समलैंगिकों को पत्थर मारकर मौत के घाट उतार दिया जाएगा
  • घर में गर्ल्स स्कूल चलाने वाली महिलाओं को उनके पति, बच्चों और छात्रों के सामने गोली मार दी जाती है
  • प्रेमी के साथ भागने वाली महिलाओं को भीड़ में पत्थर मारकर मौत के घाट उतार दिया जाता था
  • गलती से बुर्का से पैर दिख जाने पर कई अधेड़ उम्र की महिलाओं को पीटा जाता था
  • पुरुष डॉक्टर्स द्वारा महिला रोगी के चेकअप पर पाबंदी से कई महिलाएं मौत के मुंह में चली गई
  • कई महिलाओं को घर में बंदी बनाकर रखा जाता था इसके कारण महिलाओं में आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ने लगे

"शरिया कानून" लागू करना है तालिबानियों का मकसद-

  • तालिबान ने शरिया कानून के मुताबिक अफगानी पुरुषों के लिए बढ़ी हुई दाढ़ी और महिलाओं के लिए बुर्का पहनने का फरमान जारी कर दिया था
  • टीवी, म्यूजिक, सिनेमा पर पाबंदी लगा दी गई, दस उम्र की उम्र के बाद लड़कियों के लिए स्कूल जाने पर मनाही थी
  • तालिबान ने 1996 में शासन में आने के बाद लिंग के आधार पर कड़े कानून बनाए
  • इन कानूनों ने सबसे ज्यादा महिलाओं को प्रभावित किया
  • अफगानी महिला को नौकरी करने की इजाजत नहीं दी जाती थी
  • लड़कियों के लिए सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के दरवाजे बंद कर दिए गए थे
  • किसी पुरुष रिश्तेदार के बिना घर से निकलने पर महिला का बहिष्कार कर दिया जाता है
  • पुरुष डॉक्टर द्वारा चेकअप कराने पर महिला और लड़की का बहिष्कार किया जाएगा
  • तालिबान के किसी भी आदेश का उल्लंघन करने पर महिलाओं को निर्दयता से पीटा और मारा जाएगा

उत्तरी पाकिस्तान में तालिबान का हुआ था उदय

1990 की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में तालिबान का उदय माना जाता है। इस दौर में सोवियत सेना अफगानिस्तान से वापस जा रही थी। पश्तून आंदोलन के सहारे तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी जड़े जमा ली थीं। 1996 में तालिबान ने अफगानिस्तान के अधिकतर क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। 2001 के अफगानिस्तान युद्ध के बाद यह लुप्तप्राय हो गया था पर एक बार फिर से बदली हुई परिस्थितियों में फिर से शक्तिशाली हो रहा है।

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