Afghanistan: तालिबान का दावा- पंजशीर के सभी जिलों पर हुआ कब्जा, प्रांतीय केंद्र में जारी है लड़ाई

Panjshir: लगभग पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर चुके तालिबान ने दावा किया है कि उसने पंजशीर के सभी जिलों पर कब्जा कर लिया है। हालांकि रेसिस्टेंस फ्रंट ने इन दावों को नकारा है।

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फाइल फोटो 

नई दिल्ली: तालिबान ने दावा किया है कि पूरा अफगानिस्तान उसके नियंत्रण में है और पंजशीर का मुद्दा सुलझा लिया गया है। पंजशीर में लड़ाई जारी रहने के बीच तालिबान ने रविवार को कहा कि उन्होंने पंजशीर प्रांत के सभी जिलों पर कब्जा कर लिया है लेकिन प्रांतीय केंद्र में लड़ाई जारी है। हालांकि, रेसिस्टेंस फ्रंट ने तालिबान के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने परियन जिले को तालिबान बलों से वापस ले लिया है। तालिबानी ताकतें और रेसिस्टेंस फ्रंट दोनों ही युद्ध के मैदान में अपना दबदबा होने का दावा कर रहे हैं।

तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के उप प्रमुख अहमदुल्ला वासिक ने रविवार को कहा कि तालिबान बलों ने पंजशीर के सभी जिलों पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक अमीरात के मुजाहिदीन पंजशीर के सभी इलाकों और जिलों में सक्रिय रूप से मौजूद हैं। सभी इलाके मुजाहिदीन के कब्जे में हैं। उन्हें केवल पंजशीर के केंद्र में बजरक में प्रतिरोध का सामना करना पड़ा।

तालिबान बलों ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने रेसिस्टेंस फ्रंट द्वारा इस्तेमाल किए गए भारी उपकरण ले लिए हैं। तालिबान कमांडर मावलवी सखिदाद मजमार ने कहा कि हमने दुश्मन की कई तोपें ले ली हैं।

रेसिस्टेंस फ्रंट के प्रवक्ता फहीम दश्ती ने एक ट्वीट में कहा कि लड़ाई में तालिबान के कई आतंकी मारे गए हैं। दश्ती ने ट्वीट किया कि पंजशीर का परियन तालिबान से पूरी तरह से मुक्त हो गया है। कम से कम 1000 आतंकवादी फंस गए थे क्योंकि उनके प्रवेश और निकास के रास्ते बंद थे। सभी हमलावरों को स्थानीय लोगों ने रेसिस्टेंस फ्रंट के समर्थन से गिरफ्तार कर लिया या मार डाला जब वे भाग रहे थे। गिरफ्तार किए गए लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी हैं और उनमें से ज्यादातर विशेष रूप से पाकिस्तानी हैं। 

अफगानिस्तान की राजधानी के उत्तर में स्थित छोटे से प्रांत पंजशीर में तालिबान विरोधी लड़ाकों का नेतृत्व अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह कर रहे हैं। पंजशीर के लड़ाकों से तालिबान के कई प्रतिनिधिमंडलों ने बात की है जो विफल रही है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद सालेह पंजशीर पहुंच गए थे जिसके बारे में कहा जाता है कि उसे कोई जीत नहीं सकता।
 

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