नेपाल को नहीं चीनी टीके पर भरोसा! वैक्सीन लेने की बारी आई तो बोला- भारत है न

दुनिया
Updated Jan 06, 2021 | 22:01 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली भारत दौरे पर आने वाले हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर समझौता हो सकता है। नेपाल चाहता है कि भारत उसे वैक्सीन की आपूर्ति करे।

coronavirus vaccine
कोरोना वायरस वैक्सीन 

मुख्य बातें

  • नेपाल के विदेश मंत्री 14 जनवरी को भारत आएंगे
  • नेपाल ने भारत से कोरोना वायरस टीके की मांग की है
  • भारत में 2 कोरोना वायरस वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है

नई दिल्ली: नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली 14 जनवरी को भारत आ रहे हैं। वो विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ नेपाल-भारत संयुक्त आयोग की छठी बैठक में भाग लेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच नेपाल को कोविड 19 वैक्सीन प्रदान करने पर एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की संभावना है। नेपाल ने पहले ही भारत को एक कूटनीतिक नोट भेजा है, जिसके तहत देश ने भारत से कोविड के टीके की मांग की है।

अपनी यात्रा के दौरान ग्यावाली को उम्मीद है कि नेपाल को भारत में उत्पादित कोरोना वायरस टीकों की 12 मिलियन से अधिक खुराक की आपूर्ति मिलेगी। नेपाल को चीन ने सिनोवैक वैक्सीन की आपूर्ति की पेशकश की है। लेकिन नेपाल ने वैक्सीन को लेकर भारत को प्राथमिकता दी है। भारतीय अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान, नेपाली अधिकारियों ने कहा है कि ओली सरकार ने नई दिल्ली से वैक्सीन लेना पसंद किया है।

भारत में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य पहले से ही भारतीय वैक्सीन निर्माताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कर चुके हैं। उनकी आखिरी मुलाकात मंगलवार को भारत बायोटेक के कार्यकारी निदेशक डॉ. वी. कृष्ण मोहन के साथ हुई, जो स्वदेशी रूप से विकसित कोविड टीके का उत्पादन कर रहे हैं। 

चीन की नेपाल पर पकड़ बनाने की कोशिश

हाल में भारत और नेपाल के संबंधों में गिरावट देखी गई, जिसका फायदा चीन ने उठाने की कोशिश की। हाल ही में सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में बिखराव को देखते हुए सुलह कराने के इरादे से चीन अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं को काठमांडू भेजा। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) में उठापटक से परेशान चीन इसे विभाजित होने से बचाने के अपने अंतिम प्रयास के तहत अपने नेताओं को नेपाल भेजा। दरअसल, पिछले महीने नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने संसद को भंग कर दिया था। इसके बाद माना जा रहा है कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी दोफाड़ हो चुकी है। केपी शर्मा ओली ने 20 दिसंबर को संसद भंग करने की अनुशंसा राष्‍ट्रपति विद्या देवी भंडारी से की थी, जिसे मंजूर करते हुए राष्‍ट्रपति ने देश में मध्‍यावधि चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया था।

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