Myanmar : क्या ताकत के बल पर लोगों की आवाज दबाना चाहती है सेना

दुनिया
आलोक राव
Updated Feb 16, 2021 | 08:09 IST

Myanmar Military Coup : सेना के इतिहास को देखते हुए लोगों को उसकी बातों पर विश्वास नहीं हो रहा है। देश की सबसे बड़ी नेता आंग सान सू की सहित अन्य राजनीतिक हस्तियों को नजरबंद कर दिया गया।

Myanmar’s army wants to opress people protest with iron hand
क्या ताकत के बल पर लोगों की आवाज दबाना चाहती है सेना।  |  तस्वीर साभार: AP

यंगून : सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार में सब कुछ सामान्य नहीं है। इस तख्तापलट के खिलाफ लोग सड़कों पर आ गए हैं और लोकतंत्र की बहाली की मांग कर रहे हैं। लोगों का यह प्रदर्शन सेना को पसंद नहीं आ रहा है। वह इस जनाक्रोश को दबाने के लिए अपनी तरफ से हर कोशिश कर रही है। पहले इंटरनेट सेवा ठप की गई और फिर सड़कों पर सेना की बख्तरबंद गाड़ियां उतार दी गईं। देश की कमान अपने हाथों में लेने वाली सेना ने हालांकि कहा है कि उसने देश में एक साल तक के लिए आपात लगा है। 

नजरबंद हैं आंग सान सू की और बड़े नेता
सेना के इतिहास को देखते हुए लोगों को उसकी बातों पर विश्वास नहीं हो रहा है। देश की सबसे बड़ी नेता आंग सान सू की सहित अन्य राजनीतिक हस्तियों को नजरबंद कर दिया गया। इनकी रिहाई कब होगी इस बारे में स्पष्ट रूप से अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। म्यांमार में सैन्य तख्तापलट की घटना दुनिया भर का ध्यान खींचा है।  हाल के वर्षों में तख्तापलट की यह एक बड़ी घटना है। दुनिया के ताकतवर देशों अमेरिका, ब्रिटेन सहित संयुक्त राष्ट्र ने इस घटनाक्रम पर मुखर रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका ने म्यांमार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही है तो संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों पर यदि सेना ने सख्ती दिखाई तो उसे 'गंभीर परिणाम' भुगतने होंगे। 

देश भर में हो रहे प्रदर्शन
संयुक्त राष्ट्र का लहजा काफी तल्ख है लेकिन म्यांमार की सड़कों पर सेना की बख्तरबंद गाड़ियां और सैनिक जिस तरह से शहरों की सड़कों पर मार्च कर रहे हैं उससे जाहिर है कि सैन्य सरकार लोगों के आंदोलन एवं उनकी आवाज को दबाना चाहती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक गत रविवार को सेना ने म्यांमार के उत्तरी इलाके स्थित एक बिजली संयंत्र के पास प्रदर्शन कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए उन पर गोलीबारी की। लोगों को प्रदर्शन करते करीब 10 दिन हो चुके हैं। सैन्य तख्तापलट के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन ने जोर पकड़ लिया है। सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। इसकी वजह से सैन्य सरकार को अपना कामकाज करने में मुश्किलें आ रही हैं। 

संयुक्त राष्ट्र ने जुंटा को चेताया
लोगों के प्रदर्शन पर सख्ती का मामला सामने आने पर संयुक्त राष्ट्र ने जुंटा के डिप्टी हेड को आगाह किया। संयुक्त राष्ट्र की प्रवक्ता फरहान हक ने कहा है कि उन्होंने म्यांमार की सेना को बता दिया है कि उनकी गतिविधि पर दुनिया की करीबी नजर है और लोगों के खिलाफ उसने यदि कड़े कदम उठाए तो सेना को 'गंभीर परिणाम' भुगतने होंगे।  इस बीच सेना ने आंग सान सू ची की हिरासत 17 फरवरी तक बढ़ा दी है।

मंडाले में हजारों इंजीनियरों ने सड़कों पर मार्च किया
सोमवार को देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मंडाले में हजारों इंजीनियरों ने सड़कों पर मार्च किया, नारेबाजी की तथा वे हाथों में तख्तियां पकड़े हुए थे जिनमें लिखा था, ‘हमारी नेता को रिहा करो’, ‘न्याय के साथ कौन खड़ा है?’और ‘आधी रात में लोगों को अवैध तरीके से गिरफ्तार करना बंद करो।’ यंगून में इंटरनेट सेवा बंद होने और सड़कों पर सैन्य वाहनों की मौजूदगी की वजह से सोमवार को कम प्रदर्शनकारी जुटे। फिर भी म्यांमार केंद्रीय बैंक के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारी थे जहां सैनिकों से भरे सैन्य ट्रक, दंगा रोधी पुलिस और वॉटर कैनन ट्रैक तैनात थे।
 

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