नई दिल्ली। फ्रांस पर इस समय मुश्किल के दौर से गुजर रहा है। शार्ली ऐब्दो द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर बना कार्टून एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल इस मामले की जब सुनवाई शुरू हुई तो उस समय फ्रांस की सड़कों पर विरोध शुरू हुआ। उस विरोध पर राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रॉ ने कहा कि देश को इस्लामी अतिवाद से खतरा है और उससे निपटने के लिए कड़े कानून की जरूरत है। फ्रांस इस बात को सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में इस्लामी संगठनों से जुड़े संगठन किसी तरह का खलल ना डाल सके। लेकिन उनके इस बयान का तुर्की और पाकिस्तान विरोध कर रहे हैं।
नीस में तीन लोगों की हत्या
गुरुवार को फ्रांस के दक्षिणी शहर नीस में चर्च में संदिग्ध हमलावर मे एक महिला के गले को काट दिया और दो लोगों की हत्या कर दी। इस घटना को नीस के मेयर मे आतंकी घटना करार दिया, हालांकि पुलिस की तरफ से इस तरह का बयान नहीं आया है। इन सबके बीच मलेशिया के पूर्व पीएम डॉ मोहाथिर मोहम्मद ने जहरीला बयान दिया है।
मोहाथिर मोहम्मद का बयान
- मुसलमानों को गुस्सा करने और अतीत के नरसंहार के लिए लाखों फ्रांसीसी लोगों को मारने का अधिकार है।
- लेकिन बड़े और मुसलमानों ने "आंख के बदले आंख" कानून लागू नहीं किया है। मुसलमान नहीं करते। फ्रांसीसी को नहीं होना चाहिए। इसके बजाय फ्रेंच को अपने लोगों को दूसरे लोगों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाना चाहिए।
- चूंकि आपने सभी मुस्लिमों और मुस्लिमों के धर्म को दोषी ठहराया है, जो एक नाराज व्यक्ति द्वारा किया गया था, मुसलमानों को फ्रेंच को दंडित करने का अधिकार है। बहिष्कार इन सभी वर्षों में फ्रांसीसी द्वारा किए गए गलतियों की भरपाई नहीं कर सकता है।
इस्लामोफोबिया से बचें फ्रेंच राष्ट्रपति
पाकिस्तान ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रॉ से अपील की है कि वो इस्लामोफोबिया से बचें। इमरान खान ने कहा कि इस तरह के बयान से नफरत फैलती है, जिस तरह से इमैनुअल मैक्रॉ ने अपने विचारों को रखा है कि वो वैश्वित शांति के लिए सही नहीं है। इसके अलावा तुर्की ने फ्रांस के राष्ट्रपति के बयान को भड़काने वाला करार दिया।

