लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था से सांसत में इमरान खान, एक बार फिर वित्त मंत्री को बदला, हम्माद अजहर को जिम्मेदारी

पाकिस्तान को पिछले ढाई साल में तीन वित्त मंत्री मिले हैं। डॉ अब्दुल हफीज शेख की जगह अब हम्माद अजहर को जिम्मेदारी दी गई है।

लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था से सांसत में इमरान खान, एक बार फिर वित्त मंत्री को बदला, हम्माद अजहर को जिम्मेदारी
इमरान खान ने अपने वित्त मंत्री को एक बार फिर बदला 

मुख्य बातें

  • इमरान खान ने पिछले ढाई साल में तीन वित्त मंत्री बदले
  • अब हम्माद अजहर को मिली जिम्मेदारी
  • पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गड्ढे में, लोग बढ़ती कीमतों से परेशान

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई है। इमरान खान ने बेपटरी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एक और प्रयोग किया है। उस प्रयोग के तहत उन्होंने अपने वित्त मंत्री को बदल दिया है। वित्त मंत्री रहे डॉ अब्दुल हफीज शेख को पद से हटा दिया है। उनकी जगह जगह उद्योग एवं उत्पादन मंत्री हम्माद अजहर को नया वित्त मंत्री नियुक्त किया है। सूचना मंत्री ने सोमवार को यह जानकारी दी। समा टीवी न्यूज चैनल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री शिबली फराज के हवाले से कहा कि प्रधानमंत्री खान ने बढ़ती महंगाई के मद्देनजर नई वित्त टीम को लाने का निर्णय लिया है।

हम्माद अजहर तीसरे वित्त मंत्री
2018 में इमरान खान के सत्ता में आने के बाद से वित्त मंत्रालय संभालने वाले हम्माद अजहर तीसरे मंत्री होंगे। फराज ने पहले ही कहा था कि मंगलवार तक कई अन्य बदलाव के संबंध में भी जानकारी सामने आ सकती है।अजहर ने ट्वीट किया कि पीएम इमरान खान की तरफ से उन्हें वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।'

पाकिस्तान की जीडीपी -.4 फीसद पर
इमरान खान की सरकार बनने के बाद पाकिस्तान की जीडीपी 5.6 प्रतिशत से गिरकर -0.4 प्रतिशत तक आ गई है। इमरान खान ने अपना वित्त मंत्री ऐसे समय में बदला है जब एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से उसे 6 अरब डॉलर की राहत राशि दिए जाने पर विचार किया जा रहा है।

आईएमएफ से राहत पैकेज की आस
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान के आर्थिक सुधारों को लेकर उठते सवालों के मद्देनजर यह राहत पैकेज एक साल के लिए रोक दिया था।हाल ही में सीनेट चुनाव में युसूफ रजा गिलानी से हारने के बाद शेख के राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता थी। शेख को पिछले साल वित्त मंत्री बनाया गया था। हालांकि वह संसद के सदस्य नहीं थे।

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