16 साल की ग्रेटा थनबर्ग बनी 'Times Person of The Year 2019', क्लाइमेट चेंज पर दुनिया को दिखाया था आइना

UN में क्लाइमेट चेंज पर दुनियाभर के नेताओं को संबोधित कर ग्लोबल मीडिया में सुर्खी बनी स्वीडिश ग्रेटा थनबर्ग को टाइम्स मैगजीन की तरफ से टाइम्स पर्सन ऑफ द ईयर 2019 चुना गया है।

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ग्रेटा थनबर्ग चुनी गईं टाइम्स पर्सन ऑफ द ईयर 2019  |  तस्वीर साभार: Twitter

मुख्य बातें

  • 16 साल की स्वीडिश गर्ल ग्रेटा थनबर्ग बनी टाइम पर्सन ऑफ द ईयर 2019
  • सबसे कम उम्र में टाइम पर्सन ऑफ द ईयर बनने का रिकॉर्ड किया अपने नाम
  • UN में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर संबोधित कर दुनिया भर का ध्यान किया था आकर्षित
  • 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़कर इस मुद्दे पर आंदोलन कर दिया था शुरू

नई दिल्ली : जलवायु परिवर्तन पर दुनियाभर के भावी पीढ़ी के ऊपर मंडराने वाले खतरे को संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच से उठाने वाली 16 साल की बच्ची ग्रेटा को आज कौन नहीं जानता है। स्वीडिश क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग को टाइम मैगजीन की तरफ से टाइम्स पर्सन ऑफ द ईयर 2019 चुना गया है।

थनबर्ग जो आने वाले जनवरी में 17 साल की हो जाएगी, उसने बेहद कम उम्र में ही क्लाइमेट के प्रति अपनी चिंता जताकर दुनिया भर के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई थी। 16 साल की ग्रेटा ने सबसे कम उम्र में ही टाइम्स पर्सन ऑफ द ईयर चुने जाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) में क्लाइमेट चेंज पर सीधे और सपाट लहजे में अपने विचार रखकर और दुनिया भर के नेताओं को आइना दिखाकर ग्रेटा ग्लोबल मीडिया में सुर्खियों में आई थी। टाइम मैगजीन के लिए ग्रेटा की ली गई ये तस्वीर 4 दिसंबर 2019 की है, ये तस्वीर पुर्तगाल के लिस्बन से समुद्री तट पर ली गई थी।

ग्रेटा सबसे पहले पिछले साल स्वीडन के संसद में जलवायु परिवर्तन पर अपनी आवाज उठाई थी। उसी समय वह सबसे पहले चर्चा में आई थी इसके बाद उसे संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस विषय पर बोलने का मौका मिला था जहां पर उसने दुनियाभर के विकसित देशों पर जलवायु परिवर्तन का आरोप लगाया था।

विकसित देशों पर लगाया था ये आरोप
उसने कहा था कि आज के समय में उस जैसे कई बच्चों का बचपन आज खतरे में है जिसके लिए ये विकसित देश जिम्मेदार हैं। ग्रेटा के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हुआ था जिसे दुनियाभर के लोगों का समर्थन मिला था।

उसने यूएन के मंच से विकसित देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए सीधे और सपाट लहजे में कहा था कि वे जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जो भी कार्रवाई कर रहे हैं वह महज दिखावा है वे इस पर कतई गंभीर नहीं हैं। 

इस उपलब्धि पर क्या कहा ग्रेटा ने
बताया जाता है कि टाइम्स की तरफ से ये घोषणा किए जाने के समय ग्रेटा स्पेन के मैड्रिड में थीं। जब उसे इस उपलब्धि के बारे में पता चला तो उसने कहा कि 'हम यह मानकर नहीं जी सकते कि कल नहीं आएगा, क्योंकि कल आएगा. हमें आने वाले कल के लिए बेहतर माहौल बनाने की जरूरत है।'

यहां देखें UN में ग्रेटा के द्वारा दिया गया स्पीच

 

स्कूल छोड़कर मूवमेंट शुरू किया था
उसने 2018 में स्कूल की पढ़ाई छोड़ कर जलयावु परिवर्तन के खिलाफ मूवमेंट शुरू कर दिया था। स्वीडिश पार्लियामेंट के बाहर कैंप लगाकर उसने धरना प्रदर्शन किया था जिसके बाद वे चर्चा में आई थी। इसके 16 महीने के बाद ही ग्रेटा को यूएन जैसे मंच पर बोलने का मौका मिला उसके बाद उसने दुनिया की नजरों में अपनी जगह बनाई जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दे पर सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। उसके इस मूवमेंट के बाद ही क्लाइमेट स्ट्राइक दुनिया में सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला वर्ड बन गया। 

खेलने-कूदने की उम्र में उठाया ये जिम्मा
जहां इस उम्र में बच्चे पढ़ाई लिखाई और खेलकूद की बातें करते हैं और उनमें व्यस्त रहते हैं वहीं इस उम्र में ग्रेटा ने कुछ इस तरह के मुद्दों को उठाने का काम किया। उसने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर अगर अब भी हम नहीं सुधरे तो समुंदर का स्तर बढ़ता ही चला जाएगा, शहरें बाढ़ में डूब जाएंगी। करोड़ों लोगों को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।

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