यूएनजीए में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ की अगर मगर, भारत के साथ चाहते हैं शांति लेकिन

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 24, 2022, 07:40 AM IST

पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है। अपने मुल्क की तरक्की चाहता है। लेकिन अपनी नाकामी का ठिकरा दूसरे मुल्कों पर फोड़ता है। यूएनजीए में पीएम शहबाज शरीफ अपनी परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि मुल्क में स्थिरता के लिए बाहरी माहौल का ठीक होना जरूरी है।

यूएनजीए में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ की अगर मगर, भारत के साथ चाहते हैं शांति लेकिन
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संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच से दुनिया के अलग अलग देश अपनी बातों को रख रहे हैं। उस क्रम में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि वो भारत के साथ शांति चाहते हैं। लेकिन रचनात्मक माहौल के लिए भारत को आगे आना होगा। शांति स्थापित करने के लिए भारत को कुछ सार्थक कदम उठाने होंगे।  संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77 वें सत्र के दौरान बोलते हुए कहा कि भारत को 15 अगस्त 2019 के अपने अवैध कदमों को उलटते हुए शांति और संवाद के मार्ग पर चलने के लिए अपनी ईमानदारी और इच्छा का प्रदर्शन करना चाहिए।

भारत को सीख और नसीहत
संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भारत से लंबे समय से लंबित प्रस्तावों को लागू करने का आग्रह करने में अपनी सही भूमिका निभाने का अनुरोध किया। शहबाज ने कहा कि भारतीय कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर में कश्मीरियों के भारत के क्रूरता की आलोचना की अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं,कैद,हिरासत में यातना और मौत, पैलेट गन के साथ कश्मीरी युवाओं को जानबूझकर निशाना बनाने और 'सामूहिक दंड' की निंदा की। पूरे समुदायों पर थोपा गया। भारत मुस्लिम-बहुल जम्मू-कश्मीर को अवैध जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के माध्यम से हिंदू-बहुल क्षेत्र में बदलने की मांग कर रहा है।

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'पाकिस्तान को स्थिर बाहरी माहौल की जरूरत'
प्रधान मंत्री ने पाकिस्तान में जलवायु तबाही के बारे में बात की, जिसने देश के एक तिहाई हिस्से को पानी के नीचे धकेल दिया।मानसून से प्रेरित बाढ़ ने 33 मिलियन लोगों को प्रभावित किया है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं जो स्वास्थ्य के लिए खतरे में हैं। उन्होंने कहा कि सड़कें, पुल और घर प्रभावित हुए हैं, जबकि 40 लाख एकड़ फसल बह गई है और दस लाख से ज्यादा जानवर मारे गए हैं।पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन के बारे में बात करते हुए पीएम ने कहा कि देश ने इस आपदा को ट्रिगर करने में कोई भूमिका नहीं निभाई है क्योंकि पाकिस्तान 1% से कम ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करता है, लेकिन 10 सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील देशों की सूची में आता है।

'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता'
पीएम शाहबाज ने अपने पहले यूएनजीए संबोधन के दौरान कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा करता है।आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। यह हठधर्मिता पर आधारित है। गरीबी, अभाव, अन्याय और अज्ञानता से प्रेरित और निहित स्वार्थों से प्रेरित है। पाकिस्तान आतंकवाद का मुख्य शिकार बना हुआ है।पिछले दो दशकों में, हमें आतंकवादी हमलों के कारण 80,000 से अधिक लोग हताहत हुए हैं और 150 बिलियन डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। हम इस तरह के सीमा पार आतंकवाद को हराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इस्लामोफोबिया पर पीएम का रुख
इस्लामोफोबिया के मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए, पीएम ने कहा कि भारत के 200 मिलियन से अधिक मुसलमानों के खिलाफ उत्पीड़न का आधिकारिक रूप से प्रायोजित अभियान इस्लामोफोबिया की सबसे खराब अभिव्यक्ति है।पीएम शहबाज ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए 15 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में नामित करने से संयुक्त राष्ट्र और सदस्य राज्यों द्वारा इस मुद्दे से निपटने के लिए ठोस उपाय किए जाने चाहिए।

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