नेपाली जमीन पर चीन धीरे धीरे कर रहा है कब्जा, क्या जानबूझकर नेपाली पीएम के पी शर्मा ओली चुप हैं

दुनिया
ललित राय
Updated Aug 23, 2020 | 00:00 IST

China encroaches Nepal land: ऐसे में सवाल उठता है कि क्या के पी शर्मा ओली पूरी तरह चीन के जाल में फंस चुके हैं। नेपाल के सर्वे डिपार्टमेंट से जो जानकारी मिली है वो उसी तरफ इशारा कर रही है।

नेपाली जमीन पर चीनी धीरे धीरे कर रहा है कब्जा, क्या जानबूझकर नेपाली पीएम के पी शर्मा ओली चुप हैं
के पी शर्मा ओली, नेपाल के पीएम 

मुख्य बातें

  • नेपाल के सात जिलों की करीब 1.5 किमी जमीन पर चीनी कब्जा, नेपाल के सर्वे डिपार्टमेंट ने दी जानकारी
  • नेपाल के विपक्षी दल के पी शर्मा ओली सरकार पर साध रहे हैं निशाना
  • नेपाली सर्वे डिपार्टमेंट का भी मानना है कि ओली सरकार वास्तविक आंकड़ों को छिपा रही है।

काठमांडू: क्या चिकनी चुपड़ी बात और मदद के नाम पर नेपाल की जमीन को चीन निगल रहा है। यूं कहें तो क्या नेपाली जमीन पर चीन कब्जा कर रहा है। दरअसल यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि नेपाल के कृषि विभाग की सर्वे रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है कि चीन से लगे सात जिलों की भूभाग पर चीनी सरकार जमीन पर कब्जा कर रही है और नेपाल चुप है। नेपाली जमीन पर कब्जा करने के साथ ही चीन भौगोलिक बदलाव कर रहा है। 

ओली सरकार छिपा रही है आंकड़े
चीनी अतिक्रमण के बारे में बताया जा रहा है कि सरकार की तरफ से अतिक्रमण संबंधी आंकड़ों को छिपाया  रही है। वास्तविक हालात कुछ और हैं। नेपाली कम्यूनिस्ट पार्टी चीन की विस्तारवादी नीति पर पर्दा डालने का काम कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि जमीन हथियाने की रफ्तार तेजी से बढ़ी है और चाइनीज कम्यूनिस्ट पार्टी नाराज न हो इसके लिए के पी शर्मा ओली की जुबां बंद है, वो सबकुछ देखते और समझते हुए नहीं बोल रहे हैं। चीन की इस तरह की हरकत पर न केवल विपक्षी दल आरोप  लगा रहे हैं बल्कि पुष्प कमल दहल प्रचंड भी मोर्चा खोले हुए हैं जो ओली के विरोधी हैं।

नेपाल के ये जिले चीनी अतिक्रमण से प्रभावित

  1. डोलाखा
  2. गोरखा
  3. डारचुला,
  4. हुमला
  5. सिंधुपाल चौक
  6. संखुवसाभा
  7. रसुवा

डोलाखा में हालात ज्यादा खराब
नेपाल के सर्वे और मैपिंग डिपार्टमेंट का कहना है कि इन जिलों में करीब डेढ़ किमी तक चीन की तरफ से अतिक्रमण हो चुका है। खासतौर से डोलाखा के कोरलांग इलाके की पिलर संख्या 57 का जिक्र है जो पहले कोरलांग की चोटी पर था लेकिन अब वहां नहीं है। इसी तरह से दूसरे जिलों में जिस भूभाग पर पिलर चीन के साथ सीमा निर्धारण करते थे उन सभी पिलर्स को उनके मूल स्थान से हटा दिया गया है। 

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