पंजशीर में तालिबान ने फिर मुंह की खाई, संघर्ष में 7-8 लड़ाकों की मौत

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Aug 31, 2021, 05:01 PM IST

Taliban: तालिबान ने सोमवार रात अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी में संघर्ष किया, जिसमें उसके 7-8 लड़ाके मारे गए। पंजशीर घाटी पर अभी भी तालिबान का कब्जा नहीं है।

पंजशीर में तालिबान ने फिर मुंह की खाई, संघर्ष में 7-8 लड़ाकों की मौत
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नई दिल्ली: तालिबान के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अहमद मसूद के प्रवक्ता फहीम दश्ती ने कहा है कि सोमवार रात पंजशीर घाटी में हुई एक लड़ाई में तालिबान के सात-आठ लड़ाके मारे गए। दश्ती ने कहा कि तालिबान ने सोमवार रात पंजशीर पर हमला किया। इस घटना में दोनों पक्षों को चोटें आईं जबकि सात-आठ तालिबान लड़ाके मारे गए। इस झड़प की खबर तब आई है जब अफगानिस्तान से सभी अमेरिकी सैनिकों की वापसी हो गई है। 

रविवार को तालिबान ने पंजशीर में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं थीं ताकि पंजशीर की सेना में शामिल हुए पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ट्विटर पर अपने विचार साझा न कर सकें। 15 अगस्त को तालिबान के अधिग्रहण के बाद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश से भाग जाने के बाद सालेह ने पहले खुद को देश के संविधान के अनुसार अफगानिस्तान का वैध कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया था।

पंजशीर एकमात्र अफगानिस्तान प्रांत है जो अभी तक तालिबान के हाथों में नहीं आया है। कई तालिबान विरोधी पंजशीर में जमा हो गए हैं। प्रसिद्ध अफगान विद्रोही कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद इस समय अमरुल्ला सालेह के साथ पंजशीर घाटी में हैं। इससे पहले, फहीम दश्ती ने कहा कि पंजशीर में प्रतिरोध बल तालिबान के खिलाफ न केवल प्रांत के लिए बल्कि अफगानिस्तान के लिए भी लड़ रहे हैं।

तालिबान ने पंजशीर में दूरसंचार नेटवर्क बाधित किया

पंजशीर प्रांत में स्थानीय निवासियों का कहना है कि वह तालिबान के कब्जे में नहीं है और विद्रोहियों ने दूरसंचार नेटवर्क काट दिया है। टोलो न्यूज ने बताया कि पंजशीर के निवासियों का कहना है कि फोन और इंटरनेट नेटवर्क की कमी गंभीर चुनौतियों का कारण बन रही है। IANS की खबर के अनुसार, निवासी गुल हैदर ने कहा, उन्होंने पिछले दो दिनों से पंजशीर में दूरसंचार सेवाएं बंद कर दी हैं। पंजशीर के लोग इस संबंध में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर सकते हैं। काबुल निवासी मुस्तफा का कहना है कि उनके रिश्तेदार और दोस्त पंजशीर में रहते हैं लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। 

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