Wuhan Lockdown: 1 साल पहले दुनिया ने देखा था पहला लॉकडाउन, उस वुहान का अब कैसा है हाल

दुनिया
रवि वैश्य
Updated Jan 24, 2021 | 15:06 IST

आज से एक साल पहले, 23 जनवरी, 2020 को नये कोरोनावायरस महामारी की वजह से मध्य चीन के हुपेइ प्रांत के लगभग सभी शहरों में लॉकडाउन लगा दिया गया था।

WUHAN AFTER ONE YEAR'S LOCKDOWN
दुनियाभर में इस महामारी से 20 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है  |  तस्वीर साभार: AP

दुनिया 23 जनवरी 2020 को पहले लॉकडाउन (lockdown) से रू-बरू हुई थी जब चीन (China) के हुपेइ प्रांत की राजधानी वुहान (Wuhan) खासी सुर्खियों में रहा जो कि कोविड-19 का सेंटर प्वाइंट बनकर उभरा था बताते हैं कि जब लॉकडाउन लगा, तब वुहान शहर पूरी तरह से सुनसान हो गया था सड़कों पर ना तो इंसान थे ना ही गाड़ियां हर ओर बस एक सन्नाटा पसरा था कहते हैं कि उस वक्त इसका संपर्क देश के बाकी हिस्सों से टूट सा गया था यानि एक तरीके से बड़ी भयावह स्थिति थी वुहान का जिक्र करके लोग आज भी सिहर जाते हैं।

अब इस लॉकडाउन को एक साल पूरा हो चुका है यह लॉकडाउन 8 अप्रैल, 2020 तक रहा था। एक साल पहले चीन के शहर वुहान में तड़के दो बजे लोगों के स्मार्टफोन पर एक संदेश भेजा गया था जिसमें 76 दिनों तक चलने वाले पहले कोरोना वायरस लॉकडाउन की घोषणा की गई थी।कोरोना वायरस संक्रमण का मामला सबसे पहले मध्य चीन के इसी शहर में सामने आया था।

दुनिया भर में जहां विषाणु के और संक्रामक स्वरूपों को लेकर अब भी अफरा-तफरी व अव्यवस्था की स्थिति है, करीब एक करोड़ 10 लाख की आबादी वाले इस शहर में जन-जीवन काफी हद तक पटरी पर लौट आया है।अव्यवस्था और कुछ स्थानों पर सीमित आपूर्ति के कारण कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण के प्रयास लोगों में खीझ का कारण भी बन रहे हैं।

दुनियाभर में इस महामारी से 20 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।वुहान में सड़कों पर गाड़ियों की गहमागहमी कम है लेकिन पृथकवास के लिये एक साल पहले जगह-जगह पर खड़े किये गए बैरियर अब यहां नजर नहीं आते । एक साल पहले सख्त पृथकवास नियमों के कारण लोगों की आवाजाही बंद हो गई थी, लोग अपने घरों, आवासीय परिसरों तक सिमट गए थे लेकिन अब लोगों के आने जाने पर रोक नहीं है।

चीन में कोविड-19 से हुई 4635 मौतों में से अधिकतर मामले वुहान से थे। यह आंकड़ा महीनों तक स्थिर रहा था। आठ अप्रैल को शहर से लॉकडाउन हटने के बाद यहां महामारी पर काफी हद तक अंकुश रहा। एक सवाल पहले की तरह ही अब भी कायम है कि वायरस की उत्पत्ति कहां हुई?

क्या वुहान और चीन के अधिकारियों ने दुनिया को इस महामारी के बारे में आगाह करने के लिये पर्याप्त और पारदर्शी तरीके से समय पर कदम उठाए जिससे दुनिया को इसके खिलाफ तैयारी का मौका मिल पाता? दुनिया भर में 9.8 करोड़ लोग इस महामारी से पीड़ित हुए।

चीन ने शनिवार को संक्रमण के 107 नए मामलों की घोषणा की जिससे यहां अब तक संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 88,911 हो गई। नए मामलों में से सबसे ज्यादा 56 संक्रमित हीलोंगजियांग प्रांत में सामने आए। बड़े पैमाने पर जांच अभियान के दौरान बीजिंग और शंघाई में तीन नए मामले मिले। यहां नए मामलों के सामने आने के बाद अस्पतालों और घरों के आसपास सख्त लॉकडाउन लागू किया गया था।

अधिकारियों को अगले महीने चीनी नववर्ष की छुट्टियों के दौरान संक्रमण के नए मामलों में बढ़ोतरी की आशंका है। इसलिये लोगों से यात्रा न करने और जहां तक संभव हो भीड़ वाली जगहों पर न जाने को कहा जा रहा है। स्कूलों की छुट्टियां एक हफ्ते पहले ही कर दी गई और कई में ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। घरों में और सार्वजनिक परिवहन के दौरान भी मास्क पहने लोग ही नजर आते हैं। 

लोगों की आवाजाही पर नजर रखने के लिये मोबाइल फोन ऐप की मदद ली जा रही है और यह साबित करने के लिये भी लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं कि वह उन इलाकों में नहीं गए जहां संक्रमण के प्रसार की आशंका है। कई महीनों की खींचतान व मशक्कत के बाद आखिरकार चीन ने पिछले हफ्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों को वुहान का दौरा करने की इजाजत दी और ये विशेषज्ञ फिलहाल दो हफ्ते के पृथकवास में हैं।


 

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